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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड- सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह जनता को लूटने का कोई अवसर नहीं छोड़ेगी : यशपाल आर्य

उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि, उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने राज्य में शराब सस्ती और बिजली- पानी- पढ़ाई महंगी कर अपना असली चरित्र उजागर कर दिया है । उन्होंने कहा कि सरकार के कु-निर्णयों से राज्य भर में एक नया नारा… ‘ब्लैंडर (शराब) सस्ती, सिलेंडर (रसोई गैस) महंगा’, बच्चे-बच्चे की जुबान पर चढ़ गया है।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, हाल ही में राज्य विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड उर्जा निगम के बिजली की दरों में 9.64 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया है। इससे प्रदेश के 27.50 लाख उपभोक्ता प्रभावित होंगे। आर्य ने बताया कि, पिछले अप्रैल से लेकर हाल की बृद्धि तक एक साल के भीतर चौथी बार बिजली की कीमतें बढ़ाकर सरकार ने ये सिद्ध कर दिया है कि वह जनता को लूटने का कोई अवसर नहीं गँवायेगी।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, बिजली की दरों को बढ़ाने के बाद भी निर्दयी राज्य सरकार रुकी नही, उसने उत्तराखंड जल संस्थान के पानी की दरों में 15 फीसदी बड़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। इससे पहली अप्रैल से प्रदेश भर में पानी प्रति तिमाही 150 से 200 रुपये मंहगा हो जाएगा। यशपाल आर्य ने कहा कि, पिछले एक वर्ष के अन्तराल में आम जरूरत की चीजों के दामों में कई गुना बड़ गए हैं। आम जरूरत की चीज़ों के दामों को नियंत्रित रखने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार के बस में नहीं रह गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर रसोई गैस, पेट्रोलियम पदार्थ तथा खाद्य पदार्थों के लगातार बढ़ रहे दामों के बाद राज्य सरकार द्वारा बिजली और पानी की दरों में भारी वृद्धि कर जनता को मंहगाई के दोहरे बोझ से लादने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि, ये उत्तराखंड का दुर्भाग्य ही है कि, यंहा के जिन निवासियों ने बिजली परियोजनाओं के निर्माण के लिए गांव- शहरों और संस्कृति का अस्तित्व तक गवांया अब उन्हें ही को महंगी बिजली खरीदने को मजबूर किया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, एक अप्रैल से राज्य के स्कूलों में नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। इस साल बच्चों की ड्रेस, किताब – कापियों की कीमतों में भी बड़ा उछाल आया है। सरकार ने इस सत्र में स्कूलों की फीस में बढ़ोत्तरी कर अभिवावकों के जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने कहा कि, उत्तराखंड राज्य निर्माण आन्दोलन के दौरान यंहा की मातृ शक्ति ने पुर-जोर तरीके से शराब का विरोध किया था । पूर्व में राज्य के पर्वतीय क्षेत्र में “नशा नही रोजगार दो” जैसे आंदोलन चले। आर्य ने अफसोस व्यक्त करते हुए कहा कि, उस राज्य में सरकार की प्राथमिकता शिक्षा न होकर शराब होना एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, यह महीना भेंटुली और फुल्यारियो का था, जब बेटियां को मायके से और बच्चों को घर-घर से विभिन्न प्रकार की खाद्यान्न सामग्री और वस्त्र उपहार स्वरूप भेजे जाते या दिए जाते थे ऐसे पवित्र महीने में सरकार ने सस्ती शराब और महंगी राशन बिजली-पानी-पढ़ाई कर देवभूमि की महिलाओं और बच्चों का अपमान किया है।

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