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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी- फन सिटी में स्कूल टूर पर गई छात्रा की दर्दनाक मौत, सवालों के घेरे में KVM स्कूल प्रबंधन

हल्द्वानी के केवीएम स्कूल की 17 वर्षीय छात्रा अंजलि रावत अपने स्कूल के टूर के तहत गुरुवार को बरेली के फन सिटी में गई थीं। यह टूर स्कूल प्रबंधन द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें लगभग 250 छात्र शामिल थे। अंजलि हल्द्वानी के मुखानी थाना क्षेत्र के भगवानपुर नैनी व्यू कालोनी की निवासी थीं। मौजूद जानकारी के अनुसार, जब अंजलि ने फन सिटी में बने वाटर पार्क में पानी में कदम रखा, तो कुछ ही पलों में उनकी तबियत बिगड़ने लगी, और वह बेहोश होकर पानी में गिर गईं। उनके साथ गए शिक्षकों ने तुरंत स्थिति को संभाला और उन्हें बरेली के दो निजी अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर जैसे ही अंजलि के परिवार तक पहुँची, उनके माता-पिता और परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा।

अंजलि की माँ सरिता को इस सदमे ने बेसुध कर दिया, और वह बार-बार बेहोश हो गईं। उनके घर और रिश्तेदारों के बीच मातम छा गया है। अंजलि के पिता, राजेंद्र सिंह रावत, भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं और शाहजहांपुर में तैनात हैं। अपनी बेटी की मौत से बेहद आहत राजेंद्र सिंह ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फन सिटी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे, जिसके कारण यह दुखद घटना घटी।

पिता राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन और फन सिटी प्रशासन ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की, और इसी लापरवाही के चलते अंजलि को अपनी जान गंवानी पड़ी। अंजलि के शव को हल्द्वानी स्थित डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम के लिए उसे भेज दिया है ताकि मौत का सही कारण पता चल सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अंजलि की मृत्यु का असल कारण क्या था। इस हादसे ने स्कूल टूर के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूलों द्वारा आयोजित ट्रिप्स में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी होती है, लेकिन इस मामले में लापरवाही के आरोपों ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अंजलि के परिजन इस घटना की उच्च स्तरीय जांच और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन से भी यह उम्मीद की जा रही है कि इस मामले की सख्ती से जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना दोबारा न घटे। इस हृदयविदारक घटना ने समाज में स्कूलों की जिम्मेदारियों और बच्चों की सुरक्षा के प्रति एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है।

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