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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी: ज्योलिकोट दूषित पानी मामले में बड़ी कार्रवाई, जल संस्थान के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार समेत तीन अधिकारी निलंबित

हल्द्वानी: नैनीताल जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति के बाद पीलिया और डायरिया संक्रमण के मामले में उत्तराखंड जल संस्थान ने बड़ी विभागीय कार्रवाई की है। मामले में विभाग ने लापरवाही के प्रथम दृष्टया आरोपों के आधार पर प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, सहायक अभियंता मोहन सिंह रावत और अपर सहायक अभियंता रविन्द्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, अधिशासी अभियंता नैनीताल अनीश एम. पिल्लई को भविष्य के लिए कठोर चेतावनी जारी की गई है। उत्तराखंड जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डी.के. सिंह की ओर से जारी अलग-अलग कार्यालय आदेशों में ज्योलिकोट में दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में अधिकारियों की जिम्मेदारी और उनके स्तर पर की गई कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। विभागीय जांच और अधिकारियों से मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद यह कार्रवाई सामने आई है। विभाग के आदेश के मुताबिक, ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति और उससे उत्पन्न पीलिया एवं डायरिया संक्रमण को लेकर प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने 14 सितंबर को अपना जवाब प्रस्तुत किया, लेकिन विभाग के अनुसार जवाब में उनके स्तर से विधिवत आख्या प्रस्तुत करने के बजाय अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण दिया गया। आदेश में कहा गया है कि शासन और मुख्यालय स्तर से समय-समय पर स्वच्छ एवं गुणवत्तायुक्त पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। अधीक्षण अभियंता की जिम्मेदारी के तहत निर्माणाधीन पेयजल और जलोत्सारण योजनाओं का नियमित निरीक्षण तथा अधीनस्थों को आवश्यक निर्देश देना भी शामिल है। विभाग ने माना कि ज्योलिकोट में दूषित पानी की घटना से पहले क्षेत्र का पर्याप्त निरीक्षण नहीं किया गया। साथ ही जिलाधिकारी नैनीताल की ओर से भेजे गए पत्र में भी पद के दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही का उल्लेख किया गया था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर विशाल कुमार को प्रथम दृष्टया विभागीय कार्यों और पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही का दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसी मामले में उत्तराखंड जल संस्थान नैनीताल के सहायक अभियंता मोहन सिंह रावत पर भी कार्रवाई की गई है। विभाग के अनुसार उन्हें भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और उन्होंने 18 सितंबर को अपना जवाब दिया। आदेश में कहा गया है कि सहायक अभियंता का मुख्य दायित्व अपने कार्यक्षेत्र में अनुरक्षित पेयजल योजनाओं से स्वच्छ एवं सुचारु पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना, योजनाओं के निरीक्षण के दौरान पेयजल गुणवत्ता की जांच करना और कमी मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करना है। विभागीय आदेश में कहा गया है कि ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति की घटना से स्पष्ट है कि घटना से पहले संबंधित क्षेत्र का पर्याप्त निरीक्षण नहीं किया गया। जिलाधिकारी नैनीताल की रिपोर्ट में भी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही का उल्लेख किया गया। इसके बाद मोहन सिंह रावत को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। ज्योलिकोट प्रकरण में विभाग ने अपर सहायक अभियंता रविन्द्र के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की है। उन्हें 11 सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। विभाग के मुताबिक उनके स्तर से दिए गए जवाब के परीक्षण के बाद पाया गया कि स्वच्छ और गुणवत्तायुक्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जारी निर्देशों का अनुपालन नहीं किया गया। अपर सहायक अभियंता/कनिष्ठ अभियंता के दायित्वों में अपने क्षेत्र की पेयजल योजनाओं से स्वच्छ और सुचारु जलापूर्ति सुनिश्चित करना तथा नियमित रूप से पेयजल गुणवत्ता का परीक्षण करना शामिल है। आदेश के अनुसार ज्योलिकोट की घटना से पहले संबंधित क्षेत्र का निरीक्षण नहीं किया गया था। जिलाधिकारी नैनीताल की रिपोर्ट में भी कनिष्ठ अभियंता/अपर सहायक अभियंता स्तर पर पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही का उल्लेख किया गया। इन तथ्यों के आधार पर रविन्द्र को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, ज्योलिकोट मामले में अधिशासी अभियंता अनीश एम. पिल्लई को निलंबित करने के बजाय भविष्य के लिए कठोर चेतावनी जारी की गई है। विभागीय आदेश के अनुसार अनीश एम. पिल्लई ने 23 जुलाई 2026 को नैनीताल शाखा में कार्यभार ग्रहण किया था। दूषित जलापूर्ति की सूचना मिलने के बाद एसओपी के तहत पेयजल के नमूने लिए जाने, जलापूर्ति बंद कराने, टैंकों की सफाई, प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने और अन्य कार्रवाई किए जाने का उल्लेख विभाग ने किया है। हालांकि आदेश में कहा गया है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए अधिशासी अभियंता की ओर से और अधिक तत्परता अपेक्षित थी। इसी आधार पर उन्हें भविष्य में ऐसी स्थिति को लेकर कड़ी चेतावनी दी गई है। ज्योलिकोट में दूषित पेयजल की घटना के बाद स्वास्थ्य संबंधी संकट के बीच जल संस्थान की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभाग ने अधिकारियों की जिम्मेदारियों को आधार बनाकर अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की है। तीन अधिकारियों को निलंबित किए जाने और एक अधिकारी को कठोर चेतावनी दिए जाने से साफ है कि विभाग ने मामले में प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।निलंबन अवधि में संबंधित अधिकारियों को विभागीय नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा और आदेशों के मुताबिक निलंबित अधिकारियों को निर्धारित कार्यालयों से संबद्ध किया गया है। ज्योलिकोट प्रकरण में अब विभागीय कार्रवाई के बाद यह मामला केवल दूषित पेयजल आपूर्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी, पेयजल गुणवत्ता की जांच और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी गंभीर सवालों के केंद्र में आ गया है।

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