उत्तराखण्ड
देहरादून : पत्रकारिता की आड़ में राजधानी में वसूली का खेल…
देहरादून में पत्रकारिता की आड़ में वसूली का खेल?राजधानी देहरादून में पत्रकारिता की आड़ में कथित तौर पर एक ऐसा गिरोह सक्रिय होने की चर्चा है, जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की साख को नुकसान पहुंचा रहा है।पत्रकारिता कभी जनता की आवाज बनने, व्यवस्था से सवाल पूछने और सत्ता को जवाबदेह बनाने का माध्यम हुआ करती थी। लेकिन अफसोस है कि कुछ लोग इसी सम्मानजनक पेशे को अपने निजी स्वार्थ और अवैध कमाई का जरिया बनाने में जुटे हैं।आरोप है कि तथाकथित व्यक्ति अपने को पत्रकार कहने वाला व्यक्ति अधिकारियों से साठगांठ कर पहले किसी काम को रुकवाने का दबाव बनाता है और फिर उसे दोबारा शुरू कराने के नाम पर कथित तौर पर वसूली की कोशिश करता है। जो अधिकारी इनके दबाव या झांसे में नहीं आते, उन्हें ब्लैकमेल करने और बदनाम करने की कोशिश की जाती है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पत्रकारिता अब जनहित के मुद्दे उठाने के बजाय निजी हित साधने का माध्यम बनती जा रही है?पत्रकारिता किसी की जेब भरने का कारोबार नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही का पेशा है। कुछ लोगों के कथित कृत्यों की वजह से पूरी पत्रकार बिरादरी पर सवाल खड़े होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।जरूरत ऐसे लोगों को संरक्षण देने की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने की है। पत्रकारिता की आड़ में यदि कोई वसूली, धमकी या ब्लैकमेलिंग कर रहा है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।क्योंकि कलम की ताकत जनता की आवाज बनने में है, किसी को डराकर अपना स्वार्थ पूरा करने में नहीं।



