उत्तराखण्ड
हल्द्वानी : ऑल इंडिया सर्विसेज कंडक्ट रूल्स 1968 नियम 3 और 5 की अनदेखी ना करे अधिकारी : नेता प्रतिपक्ष
ऑल इंडिया सर्विसेज कंडक्ट रूल्स, 1968 के नियम 3 और 5 की अनदेखी न करें अधिकारी
श्री यषपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष ने कह कि भारत जैसे राजनीतिक, भाषाई और सांस्कृतिक विविधताओं वाले देश में ऑल इंडिया सर्विसेज, जिसे हम सामान्यतः IAS और IPS के रूप में जानते हैं, राष्ट्र की एकता, अखंडता और प्रशासनिक निरंतरता का ‘स्टील फ्रेम’ रही हैं। इन सेवाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी निष्पक्षता, राजनीतिक तटस्थता और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता है।
श्री आर्य ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के लिए All India Services (Conduct) Rules, 1968 में निर्धारित आचरण के प्रावधान इसी भावना को मजबूत करते हैं। विशेष रूप से नियम 3 और नियम 5 अधिकारियों को यह स्पष्ट संदेश देते हैं कि उनका आचरण न केवल निष्पक्ष और कर्तव्यनिष्ठ होना चाहिए, बल्कि जनता के बीच भी उनकी निष्पक्षता स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।
नियम 3 अधिकारियों से सत्यनिष्ठा, कर्तव्य के प्रति समर्पण और ऐसे आचरण की अपेक्षा करता है जो सेवा की गरिमा के अनुरूप हो। वहीं नियम 5 राजनीतिक गतिविधियों और राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रखने की भावना को स्पष्ट करता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारी किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता की तरह व्यवहार नहीं कर सकता। प्रशासनिक निष्पक्षता केवल होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि दिखाई भी देनी चाहिए। ब्रिटिश न्यायविद स्वतक Lord Chief Justice Gordon Hewart ने 1924 में न्याय के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रतिपादित किया था कि न्याय केवल किया ही न जाए, बल्कि वह होते हुए स्पष्ट रूप से दिखाई भी दे। लोकतांत्रिक प्रशासन में यही सिद्धांत निष्पक्षता पर भी लागू होता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन की कोख से पैदा हुआ राज्य है। यहां की जनता ने अपने अधिकारों के लिए लंबे संघर्ष किए हैं और लोकतांत्रिक प्रतिकार की ताकत को भली-भांति समझती है। पिछले कुछ वर्षों में जिस प्रकार पुलिस और प्रशासन के राजनीतिक इस्तेमाल की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, वह अत्यंत चिंताजनक है। नैनीताल में एसएसपी कार्यालय के बाहर हाल में हुई घटना भी इसी संदर्भ में गंभीर सवाल खड़े करती है। घटना का मूल कारण और उसके बाद की परिस्थितियां निष्पक्ष जांच का विषय हैं, लेकिन यदि किसी प्रशासनिक कार्रवाई से ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जिसमें जनभावना भड़कती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों को अपने आचरण और कार्यप्रणाली पर गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह सवाल भी स्वाभाविक है कि यदि किसी शांतिपूर्ण रैली में आने वाले लोगों को पहले से ही ‘असामाजिक तत्व’ मान लिया जाए और उन्हें रोकने अथवा रैली को विफल करने के लिए प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल किया जाए, तो इसे उकसावे की कार्रवाई नहीं तो और क्या माना जाए?
उन्होंने कहा कि अधिकारी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता नहीं हैं सरकारें आती हैं और जाती हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाएं और प्रशासनिक व्यवस्था स्थायी होती हैं। आज आम नागरिक के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस और प्रशासन वास्तव में राजनीतिक रूप से निष्पक्ष हैं? यदि किसी अधिकारी की सार्वजनिक गतिविधियां, बयान या प्रशासनिक निर्णय किसी राजनीतिक दल के पक्ष में झुके हुए दिखाई देने लगें, तो इससे पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चाहे किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा राजनीतिक संदेश दिए जाने की बात हो, चाहे उपचुनावों के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल के आरोप हों, या फिर जिला पंचायत चुनावों में प्रशासन और पुलिस की भूमिका को लेकर उठे सवाल, इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक समीक्षा आवश्यक है। यदि कहीं भी सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के हित में हुआ है, तो यह केवल किसी एक दल का प्रश्न नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की संस्थाओं की विश्वसनीयता का प्रश्न है।
श्री आर्य ने कहा कि ईमानदार अधिकारियों के साथ कांग्रेस खड़ी है। उन्होंने कहा कि वह प्रदेश के उन सभी ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश देना चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी उनके संवैधानिक अधिकारों, स्वतंत्र कार्यप्रणाली और सम्मान की रक्षा के लिए उनके साथ खड़ी रहेगी। लेकिन जो अधिकारी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी भूलकर किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता की भूमिका में दिखाई देंगे, उन्हें यह भी समझना होगा कि लोकतांत्रिक राजनीति में राजनीतिक दल और कार्यकर्ता भी अपने अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठाना जानते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी अधिकारी के खिलाफ नहीं है, कांग्रेस राजनीतिक रूप से निष्पक्ष और संविधान के प्रति जवाबदेह प्रशासन के पक्ष में है।
श्री आर्य ने कहा कि हमारा स्पष्ट संदेश है कि सरकार किसी की भी हो, पुलिस और प्रशासन संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। वर्दी की पहचान किसी राजनीतिक दल से नहीं, संविधान से होनी चाहिए, इसलिए जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों से मेरा आग्रह है कि वे All India Services (Conduct) Rules, 1968 के नियम 3 और 5 को एक बार फिर गंभीरता से पढ़ें, समझें और उसका पालन करें।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पद की गरिमा बनी रहेगी तो संस्था की गरिमा बनी रहेगी, और संस्था की गरिमा बनी रहेगी तो लोकतंत्र पर जनता का विश्वास कायम रहेगा।




