उत्तराखण्ड
हल्द्वानी : रामगढ़ की भारती जीना ने पीरूल की टोकरी से बदली 45 महिलाओं की जिंदगी, जंगल बचाने की भी ली जिम्मेदारी
रामगढ़, नैनीताल
रामगढ़ ब्लॉक की भारती जीना को जिलाअधिकारी ललित मोहन रयाल ने सराहना किया जिला अधिकारी को हस्तशिल्प से बनाये गये भेंट स्वरूप प्रदान किया उन्होंने बताया की बचपन से ही हस्तशिल्प कला में आगे रही हैं। पीरूल की टोकरी बनाना उन्होंने अपने दादा जी से सीखा था। पहले यह काम वे शौक के तौर पर करती थीं, लेकिन धीरे-धीरे समझ में आया कि इसी काम से गाँव की महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिल सकती है।
इसी सोच के साथ भारती जीना ने अपने गाँव की 40 से 45 महिलाओं को एक साथ जोड़ा। और पीरूल की टोकरी बनाना सिखाया और सामान बनाकर बेचना शुरू किया। आज ये सभी महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं।
इसी बीच भारती जीना ने देखा कि जंगलों में आग लगने की सबसे बड़ी वजह पीरूल है। लोग अच्छी घास के लालच में पीरूल जला देते हैं क्योंकि पीरूल में अत्यधिक मात्रा में केमिकल्स पाए जाते हैं जिससे घास नहीं उगती है, इसलिए महिलाओं को और पूरे उत्तराखंड को बताना है पीरूल पहाड़ों के लिए अभिशाप नहीं है इससे भी हम पैसा कमा सकते हैं यही संदेश पूरे उत्तराखंड में देना है,आग से न सिर्फ बेजुबान जानवरों का घर उजड़ रहा है, बल्कि पहाड़ के किसानों की रोजी-रोटी भी जल रही है। पहाड़ों में किसानों के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और खर्चा फल उत्पादन से ही चलता है और वो भी आग की चपेट में आ रहा है,
बेजुबानो का घर उजड़ता देख किसानों के बच्चों का कल खत्म ना हो
तब मन में ख्याल आया कि क्यों न महिलाओं का समूह बनाकर पीरूल को ही जड़ से साफ कर दिया जाए। इसी उद्देश्य से महिलाओं का समूह बनाया जो अब जंगलों से पीरूल इकट्ठा कर उसे सुरक्षित जगह पर रखती हैं। इससे आग लगने की घटनाएं कम हो रही हैं और किसानों के फल के पेड़ भी बच रहे हैं।
हाल ही में भारती जीना कर्तव्य फाउंडेशन से भी जुड़ी हैं। संस्था के सहयोग से अब उनके इस काम को और मजबूती मिल रही है।
भारती जीना का मानना है कि छोटे प्रयासों से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। एक हुनर से रोजगार भी मिला और जंगल बचाने का काम भी शुरू हो गया।




