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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी : मंडी समिति में अतिक्रमण का सम्राज्य, प्रशासन बना मूक दर्शक…


हल्द्वानी कृषि मंडी समिति इन दिनों अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर सुर्खियों में है, लेकिन यह अभियान जितना अवैध दुकानों पर सवाल खड़े करता है, उससे कहीं ज़्यादा सवाल मंडी प्रशासन, राजनीतिक संरक्षण और वर्षों की चुप्पी पर उठाता है।
मंडी परिसर में सामने आए तथ्य किसी एक-दो दुकानों की अनियमितता नहीं, बल्कि व्यवस्थित अव्यवस्था और संरक्षण प्राप्त अवैध साम्राज्य की ओर इशारा करते हैं।
20 अवैध दो मंजिला दुकानें — बिना अनुमति, बिना डर
सूत्रों के अनुसार मंडी क्षेत्र में कम से कम 20 दुकानें ऐसी हैं जिन्हें बिना किसी अनुमति के दो मंजिला बना दिया गया।
न नक्शा पास
न निर्माण अनुमति
न सुरक्षा मानकों का पालन
प्रश्न यह है कि क्या मंडी प्रशासन को यह निर्माण दिखाई नहीं दिया?
या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
150 हायर परचेज दुकानें — न लीज, न रिकॉर्ड
मामला यहीं खत्म नहीं होता।
मंडी परिसर में करीब 150 दुकानें हायर परचेज पर संचालित हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश के पास कोई वैध लीज एग्रीमेंट ही नहीं है।
यह स्थिति सीधे तौर पर सवाल उठाती है कि
बिना लीज के दुकानें वर्षों तक कैसे चलती रहीं?
मंडी के रिकॉर्ड में ये दुकानें आखिर किस आधार पर दर्ज हैं?
किराया वसूली किस नियम के तहत हुई — या हुई ही नहीं?
100 से ज्यादा दुकानों ने 50 से 100 फीट तक कब्जा
सबसे गंभीर मामला अतिक्रमण का है।
जानकारी के अनुसार 100 से अधिक दुकानों ने अपनी दुकानों के आगे 50 से 100 फीट तक अवैध कब्जा कर रखा है।
कहीं गोदाम बना लिए गए
कहीं स्थायी शेड
कहीं खुले रास्ते तक हड़प लिए गए
यह सब मंडी समिति से बिना पूछे और बिना अनुमति किया गया।
कार्रवाई का विरोध करने वाले कौन?
जैसे ही मंडी प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की बात की, विरोध शुरू हो गया।
लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि जिन दुकानों पर कार्रवाई होनी है, विरोध करने वालों में वही लोग सबसे आगे हैं।
सूत्र बताते हैं कि
इनमें राजनीतिक दलों से जुड़े चेहरे
स्थानीय प्रभावशाली नेता
और ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी दुकानें खुद नियमों के घेरे में हैं
आरोप साफ है — ये लोग नहीं चाहते कि मंडी में कभी अतिक्रमण हटे।
सालों से किराया नहीं, फिर मंडी प्रशासन क्या करता रहा?
यह सबसे बड़ा और सबसे असहज सवाल है।
अगर वर्षों से
दुकानों का किराया नहीं दिया गया
लीज एग्रीमेंट नहीं बने
अवैध निर्माण होते रहे
तो अब तक मंडी प्रशासन क्या कर रहा था?
क्या
जानबूझकर आंखें मूंदी गईं?
राजनीतिक दबाव में नियम ताक पर रखे गए?
या फिर अंदरखाने कोई और ही खेल चलता रहा?
ईमानदार व्यापारी भुगत रहे सजा
मंडी के कई ऐसे व्यापारी जिन्होंने
नियमों का पालन किया
तय सीमा में दुकान रखी
समय पर किराया दिया
उनका कहना है कि अवैध दुकानों और अतिक्रमण ने
व्यापार असंतुलित किया
रास्ते बंद कर दिए
और मंडी की छवि खराब कर दी
आज जब कार्रवाई की बात हो रही है, तो ईमानदार व्यापारी प्रशासन के साथ खड़े हैं, जबकि अवैध कब्जाधारी विरोध कर रहे हैं।
अब अग्निपरीक्षा मंडी प्रशासन की
अब सवाल सिर्फ अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि
जवाबदेही तय करने का है।
क्या मंडी प्रशासन पुराने मामलों की जांच करेगा?
क्या वर्षों से किराया न देने वालों से वसूली होगी?
क्या अवैध निर्माण कराने वालों पर मुकदमे दर्ज होंगे?
या फिर कुछ नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
जनता पूछ रही है सवाल
हल्द्वानी की जनता अब पूछ रही है —
अगर आज कार्रवाई जरूरी है, तो कल क्यों नहीं थी?
और अगर कल गलत था, तो उसके जिम्मेदार कौन हैं?
मंडी समिति में अतिक्रमण का यह मामला अब
सिर्फ दुकानों का नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी और राजनीतिक इच्छाशक्ति की असली परीक्षा बन चुका है।

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