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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी- पर्वतीय मार्गो पर ओवरलोड यात्री वाहनों को लेकर RTO संदीप सैनी ने दिए यह निर्देश

ओवरलोड यात्री वाहनों के सम्बन्ध में विगत दिवसों में हल्द्वानी सम्भाग के पर्वतीय क्षेत्रों में निरन्तर घटित सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा के दौरान पाया गया कि ओवरलोड यात्री वाहनों के संचालन पर रोक लगाये जाने के लिए आरटीओ संदीप सैनी ने निर्देश देते हुए प्रवर्तन दलों द्वारा प्रभावी प्रवर्तन की कार्यवाही नहीं की जा रही, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में यात्री वाहनों में लगातार ओवरलोडिंग की शिकायतें प्राप्त हो रही है।

इसके अतिरिक्त यह भी उल्लेखनीय है कि टैक्सी / मैक्सी वाहनों में आर०टी०ए० द्वारा मानकों के विपरीत कैरियर जाल लगे हुए है। बिना मानक के कैरियर एवं सीढी लगी होने से वाहन में अतिरिक्त सामान रखने की सम्भावना बनी रहती वाहन का संतुलन है एवं अतिरिक्त सवारी बैठाने की प्रवृति बढ़ जाती है, जिस कारण ओवरलोडिंग होती है और बिगड़ने पर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। प्रायः यह देखा गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसी घटनाओं में वाहन के खाई में

गिरने से अधिक जनहानि होती है।

अवगत कराना है कि सम्भागीय परिवहन प्राधिकरण हल्द्वानी सम्भाग द्वारा अपनी बैठक दिनांक 09.01.2024 टैक्सी, मैक्सी सरीखे वाहनों की छत पर लगैज कैरियर लगाये जाने के सम्बन्ध में निम्न निर्णय पारित किया गया में है:-

“प्राधिकरण द्वारा उक्त के सम्बन्ध में सम्यक विचारोपरांत सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाता है कि टैक्सी, मैक्सी सरीखे वाहनों की छत पर लगैज कैरियर लगाये जाने हेतु तकनीकी परीक्षण के उपरान्त निम्न अनिवार्यताओं के अन्तर्गत वाहन की छत पर लगैज कैरियर लगाये जाने की संस्तुति की जाती है:-

  1. लगेज कैरियर हॅलोपाइप (खोखली) पाइप या एल्युमिनियम स्ट्रक्चर के बने होगें।
  2. लगैज कैरियर का क्षेत्रफल वाहन के छत के कुल क्षेत्रफल के 60 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
  3. सामान रखे जाने हेतु लगैज कैरियर के साथ बनी साइड वॉल 6 इंच से अधिक ऊँची नहीं होगी।
  4. लगैज कैरियर के साथ किसी भी प्रकार की सीढ़ी या सीढ़ीनुमा स्ट्रक्चर नहीं होगा, वाहन के आगे, पीछे किनारों में भी सीढ़ीनुमा स्ट्रक्चर अनुमन्य नहीं होगा।
  5. लगेज कैरियर में सामान इस प्रकार ही रखा जाएगा, जिससे वाहन के स्थायित्व पर कोई प्रभाव न पड़े और मार्ग पर वाहन का संचालन नियंत्रित रूप से मोटरयान अधिनियम 1988 (यथा संशोधित) एवं तद्धीन निर्मित नियमावलियों के अंतर्गत किया जा सके। इसके अतिरिक्त यात्री व सामान सहित वाहन का भार पंजीयन प्रमाण पत्र में निर्धारित वाहन के सकल यान भार की सीमा से ज्यादा न हो।”

इसके अतिरिक्त यह भी उल्लेखनीय है कि रिट याचिका संख्या 2112/एम०एस०/2011 में मा० उच्च न्यायालय द्वारा दिनाँक 06.07.2018 में निम्नवत् आदेश पारित किये गये हैः-

17 H. The Uttarakhand State Transport Department shall also register the FIRs’ under the relevant provisions of the Indian Penal Code as well as under the Motor Vehicles Act, 1988 against the violators of law involved in over speeding, over loading, use of mobile phones while driving/jumping of the red-light. The Transport Department is authorized to seize the mobile phones temporarily for a period of 24 hours after issuing a valid receipt.

अतः उक्त के दृष्टिगत आपकों निर्देशित किया जाता है कि आप हल्द्वानी सम्भाग के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाये जाने तथा अनाधिकृत रूप से लगाये गये लगेज कैरियर के विरूद्ध के दृष्टिगत निम्नांकित निर्देशों का अनुपालन करना सुनिश्चित करेंगेः-

टैक्सी/मैक्सी वाहनों में आर०टी०ए० द्वारा निर्धारित मानकों के विपरीत लगेज कैरियर पाये जाने पर उसको मौके पर ही उतारा जाये। अवैध रूप से लगे लगेज कैरियर पर कार्यवाही के साथ ही वाहन के फिटनेस, आरसी एवं परमिट के विरूद्ध संस्तुति सहित कार्यवाही हेतु सम्बन्धित पंजीयन अधिकारी एवं आर०टी०ए० को प्रेषित किया जायें।

यात्री वाहनों में ओवरलोडिंग पाये जाने पर मा० उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्देशों के कम में तत्काल एफ०आई०आर० दर्ज करायी जाये एवं चालक के लाईसेन्स के विरूद्ध कार्यवाही की संस्तुति की जायें।

उक्त के सम्बन्ध में अवगत कराया जाता है कि यात्री वाहनों में ओवरलोडिंग होने तथा जनहानि होने पर सम्बन्धित अधिकारी का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जायेगा तथा अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रकरण शासन को सन्दर्भित कर दिया जायेगा।

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