उत्तराखण्ड
देहरादून : गैंगस्टर विक्रम की हुई हत्या,पुलिस ने मामले टीम गठित कर जांच शुरू की…
देहरादून में शुक्रवार सुबह सिटी सेंटर स्थित जिम के बाहर हुई सनसनीखेज हत्या ने अब नया मोड़ ले लिया है। 45 वर्षीय विक्रम शर्मा, जिन्हें पहले स्टोन क्रशर संचालक के रूप में पहचाना गया था, के आपराधिक इतिहास को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है।पुलिस सूत्रों के अनुसार, विक्रम शर्मा पर 50 से अधिक मुकदमे दर्ज थे, जिनमें 30 से अधिक हत्या के मामले शामिल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में उनके तार झारखंड के एक गैंग से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
काशीपुर से जुड़े विक्रम शर्मा वर्तमान में देहरादून के रेसकोर्स क्षेत्र में रह रहे थे। शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे वह जिम पहुंचे थे। लगभग 10:30 बजे जैसे ही वह नीचे उतरे, घात लगाए हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हमलावर बाइक से फरार हो गए।सूत्रों का यह भी कहना है कि विक्रम शर्मा को किसी खतरे का अंदेशा था और वह हथियार लेकर आया था, लेकिन हमलावरों ने उसे प्रतिक्रिया का मौका तक नहीं दिया।
पुलिस अब इस हत्याकांड को संभावित गैंगवार से जोड़कर जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और शहरभर में नाकेबंदी कर संदिग्धों की तलाश जारी है।देहरादून, जो लंबे समय तक शांत शहर के रूप में जाना जाता रहा, अब संगठित अपराध और गैंगवार जैसी घटनाओं से जूझता दिखाई दे रहा है। लगातार हो रही आपराधिक वारदातों ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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गैंग्स ऑफ जमशेदपुर : हत्या के बाद अंडरग्राउंड रहकर काम कर रहा था आशीष डे
7 वर्ष पहले
जमशेदपुर. गैंगस्टर अखिलेश सिंह का आपराधिक गुरु विक्रम शर्मा दस साल के बाद आखिरकार पुलिस के हाथ चढ़ गया। शातिर विक्रम वेश और पहचान बदलकर उत्तराखंड के देहरादून में रह रहा था। 15 अप्रैल को जमशेदपुर पुलिस ने देहरादून में उसके किराये के फ्लैट से दबोच लिया।
अपराध जगत में विक्रम दिमाग था तो अखिलेश उसकी ताकत। विक्रम शांत स्वभाव का है तो अखिलेश उग्र था। विक्रम प्लानर तो अखिलेश अंजाम देने वाला। विक्रम की सोच होती और अखिलेश उसे पूरा करता था। जानकारों के मुताबिक, जेलर हत्याकांड के बाद विक्रम अपने शिष्य को डॉन के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहता था। उसने शहर में दहशत फैलाने के लिए बड़े कारोबारियों को निशाने पर लिया। 2 नवंबर 2007 को साकची आमबागान के पास श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में अखिलेश के साथ उसके आपराधिक गुरु का नाम भी आया। इसके बाद पुलिस उसके पीछे पड़ गई।
पुलिस की बढ़ती दबिश के कारण वह भूमिगत हो गया और अखिलेश को गिरोह का चेहरा बनाया। गिरोह ने अखिलेश के नाम पर 2008 में सीरियल क्राइम किए। टाटा स्टील के अधिकारी जयराम सिंह, ट्रांसपोर्टर अशोक सिंह की हत्या सहित ताबड़ताेड़ कई अापराधिक घटनाओं को अंजाम दिया। उनके विरोध में जो भी आया, गुरु-शिष्य ने रास्ते से साफ कर दिया। अपनों की जान लेने में भी वक्त नहीं गंवाया। परदे के पीछे रहकर उसने अखिलेश को डॉन के रूप में स्थापित किया। उसके खौफ से रंगदारी मिलने लगी। स्क्रैप कारोबार में सीधी दखल होने लगी। शिष्य के स्थापित होते ही विक्रम गायब हो गया। उसने देहरादून को ठिकाना बनाया। शहर के लोग उसे भूल ही गए थे, लेकिन दस साल के बाद पुलिस गिरफ्त में आ गया।
इधर, पांच साल तक सीबीआई में योगदान देने के बाद नवीन कुमार सिंह सोमवार को झारखंड में मुख्यालय आईजी बनाए गए। वे कोलकाता से रांची के लिए प्रस्थान करने वाले थे कि एसएसपी ने उन्हें सूचना दी कि विक्रम शर्मा पकड़ा गया है। नवीन कुमार सिंह ने शाबाशी दी, वेल डन। सिंह एसएसपी मैथ्यू के गुरु हैं। यह संयोग ही है कि सिंह ने अखिलेश को पकड़ा था और उनके शिष्य ने गैंगस्टर के गुरु विक्रम शर्मा को गिरफ्तार कराया।
विक्रम-अखिलेश से जुड़ी चर्चित घटनाएं
- 2 नवंबर 2007- साकची आम बागान के पास श्री लेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या
- 15 मार्च 2008 – साकची में रवि चौरसिया पर फायरिंग
- 20 मार्च 2008- साकची में पूर्व जज आरपी रवि पर फायरिंग
- 16 मई 2008 – साकची में श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे के घर पर फायरिंग
- 25 जुलाई- बिष्टुपुर में कांग्रेसी नेता नट्टू झा के कार्यालय पर गोली चली
- 17 अगस्त 2008- बर्मामाइंस में अपराधी परमजीत सिंह के भाई सत्येंद्र सिंह की ससुराल में फायरिंग
- 28 अगस्त 2008- साकची में ठेकेदार रंजीत सिंह पर फायरिंग
- 17 सितंबर 2008- एमजीएम अस्पताल मोड़ पर बंदी परमजीत सिंह पर फायरिंग
- 4 अक्टूबर 2008-बिष्टुपुर में बाग-ए-जमशेद के पास टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की हत्या
- 2008- बिष्टुपुर में कीनन स्टेडियम के पास ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या





