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देहरादून : खाकी पर वार: जांच की आंच आते ही आरोपी बनी वादी,राजधानी के तत्कालीन कप्तान के खिलाफ बड़ी साजिश?

खाकी पर वार: जांच की आंच आते ही आरोपी बनी वादी, दून के तत्कालीन कप्तान के खिलाफ बड़ी साजिश?

राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का फैसला चर्चा में, साक्ष्यों को दरकिनार कर एकतरफा कार्रवाई के आरोप

देहरादून। क्लेमेंट टाउन क्षेत्र के बहुचर्चित कोठी प्रकरण में नया मोड़ आ गया है। राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण द्वारा तत्कालीन एसएसपी जन्मेजय खंडूरी और थाना प्रभारी नरेंद्र गहलावत के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि जब पुलिस की निष्पक्ष जांच की सुई वादी कुसुम कपूर के दस्तावेजों की ओर घूमने लगी, तो आनन-फानन में ‘राजनीतिक रसूख’ का इस्तेमाल कर जांच की दिशा ही बदलवा दी गई। अब इस मामले में पुलिस के ईमानदार प्रयासों पर सवाल उठाकर वादी की संदिग्ध भूमिका को ढका जा रहा है।

केस डायरी: क्या जांच से डर गई थीं कुसुम कपूर?
सूत्रों और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, जिस संपत्ति को लेकर इतना बवाल मचा है, उसका मालिकाना हक शुरू से ही विवादों में है। वादी कुसुम कपूर कभी इसे पति की नानी की संपत्ति बताती हैं, तो कभी कुछ और। हकीकत यह है कि यह संपत्ति इसरो के वैज्ञानिक मोनिंदर मालिक की थी। मोनिंदर ने विदेश जाते समय अपने मित्र और मोना रंधावा के पिता को इसका केयरटेकर बनाया था। वादी के पति वी.के. कपूर को केवल एक कमरा रहने के लिए दिया गया था। कब्जे को लेकर वी.के. कपूर कोर्ट में केस भी हार चुके हैं, जहां न्यायालय ने मोना रंधावा के पक्ष को सही माना था।
बारीकी से जांच शुरू की, तो पुलिस ही बन गई ‘विलेन’
जब अमित यादव गिरोह ने फर्जी कागजों के आधार पर कोठी ढहाई, तो तत्कालीन कप्तान जन्मेजय खंडूरी ने मामले की तह तक जाने के लिए एसओजी और खुफिया विंग को सक्रिय किया। जांच में यह तथ्य उभरकर सामने आने लगा कि न केवल कब्जा करने वाला गिरोह फर्जी है, बल्कि वादी कुसुम कपूर के दावे और दस्तावेज भी संदिग्ध हैं। जानकार बताते हैं कि जैसे ही वादी को अहसास हुआ कि पुलिस की ‘गुप्त जांच’ में उनकी पोल खुल सकती है, उन्होंने प्रोपेगेंडा का सहारा लिया।

दबाव की राजनीति और प्रेस वार्ता का खेल
आरोप है कि खुद को फंसता देख वादी ने भारी राजनीतिक दबाव बनवाया और तत्कालीन डीजीपी के जरिए जांच दूसरे जिले को ट्रांसफर करा दी। हर दिन प्रेस विज्ञप्ति जारी कर खुद को ‘असहाय विधवा’ और ‘पीड़ित’ दिखाकर जनमानस और सिस्टम को गुमराह किया गया। इसी दबाव का नतीजा रहा कि पुलिस बैकफुट पर आई और बिना पूर्ण तथ्यों की पड़ताल किए अधिकारियों पर गाज गिराने की तैयारी शुरू हो गई।

प्रमुख बिंदु जो खड़े करते हैं सवाल:

अदालती आदेश की अनदेखी: कोर्ट द्वारा कब्जे के दावे को खारिज किए जाने के बावजूद संपत्ति पर अधिकार जताना।

जांच से परहेज: जब एसएसपी खंडूरी निष्पक्ष जांच कर रहे थे, तो उसे रुकवाने के लिए उच्च स्तर पर सेटिंग क्यों की गई?
पुलिस ने केवल भूमाफियाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि संपत्ति से जुड़े हर संदिग्ध पहलू की जांच शुरू की थी। शायद यही बात वादी को रास नहीं आई और उन्होंने अधिकारियों को ही निशाने पर ले लिया।

इसी प्रकरण मै शामिल कँवरपाल उर्फ केपी एक मामला जिसे दबाव के चलते कराया गया बंद

इसी प्रकरण मै एक चर्चित नाम आया था कंवरपाल उर्फ केपी सिंह का पुलिस जांच मै ये मास्टर माइंड था पूरे गेम का राजधानी में इस कोठी सहित कई मामले इसके उजागर हुए थे जिसमें करो नामी गिरामी अधिवक्ता सहित सफेद पोश लोग भी शामिल थे पुलिस से बचने के लिए आरोपी पुराने मामले में जमानत तुड़वाकर जेल चला गया था। एसआईटी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ की तो कई चेहरे बेनकाब हुए थे। दून पुलिस इस घोटाले में इसके 19 साथियों को गिरफ्तार कर चुकी थी। कई अहम जानकारी पुलिस को हाथ लगती इससे पहले सहारनपुर जेल में गिरोह के सरगना केपी सिंह की मौत हो गई।
केपी की मौत के बाद एक पुराने घोटाले को लेकर पुलिस पर सवाल उठने लगे है। एसएसपी को दिए गए शिकायती पत्र में बताया गया है कि डिस्पेंसरी रोड देहरादून में पुराना खसरा नंबर 426, खसरा नंबर 472 हाल खसरा नंबर 262 की संपति शेख हबीब अहमद रमजानी पुत्र फजल हक काम शेख सहारनपुर के नाम से थी। पूर्ण दस्तावेज जैसे पुराने बेनामों से लेकर सभी प्रतिया उपलब्ध है। आरोप है कि कंवरपाल उर्फ केपी सिंह ने कई वर्षों पहले संपत्ति के कुछ फर्जी कागजात बनाकर यह जमीन शाहनवाज पुत्र मोहम्मद इकराम निवासी खान आलमपुरा जनक नगर सहारनपुर, मोहम्मद इकराम निवासी खान आलमपुरा जनक नगर सहारनपुर, मोहम्मद इकराम खान आलमपुरा जनक नगर सहारनपुर, श्रीमती शबाना पत्नी मोहम्मद अकरम खान आलमपुरा जनक नगर सहारनपुर, श्रीमती शगुफ्ता पत्नी सिराज अहमद निवासी खान आलमपुरा जनक नगर सहारनपुर, शाइस्ता पत्नी मोहम्मद फुरकान निवासी खान आलमपुरा जनक नगर सहारनपुर, शाह आलम पुत्र मोहम्मद इकराम निवासी खान आलमपुरा जनक नगर सहारनपुर, राशिद खान पुत्र सुलेमान खान निवासी खिड़की एक्सटेंशन मालवीय नगर दक्षिण दिल्ली, एवं कागजात में खर्च करने वाला इन्वेस्टर भाटिया ने मिलकर एक षड्यंत्र के तहत अपने नाम कर लिया था। कई वर्षों से भूमि पर अनूप मित्तल पुत्र स्वर्गीय लालचंद मित्तल कब्जा था। अनूप कुमार मित्तल को जब यह पता चला तो उन्होंने कोतवाली नगर में इन लोगों के खिलाफ अपराध सख्या 0089 धारा 420,467,468,471,447, 506,120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। इन लोगों के खिलाफ एसआईटी जांच भी हुई, जिसमें उन्हें दोषी बताया गया, मगर साठगांठ के चलते इनका कुछ नहीं हुआ। बाद में इसकी जांच एसआईएस शाखा ने भी की। सूत्रों से पता चला है कि कुछ समय पहले इस मुकदमे मे पुलिस ने सांठगाठ कर अन्तिम रिर्पोट लगा दी है । #DoonPolice #DEHRADUNpolice #dehradunnews #UttarakhandPolice #pushkarsinghdhamicm #CMUttrakhand #ukcmo #dehraduncity #PushkarSinghDhami #dehradundiaries #ips #policeofficer

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