उत्तराखण्ड
हल्द्वानी: पहाड़ की बेटी अंकिता भंडारी को कब मिलेगा इंसाफ ? नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने उठाई CBI जांच की मांग
हल्द्वानी: उत्तराखंड की शांत वादियों से उठी एक मासूम आवाज़ आज भी न्याय की पुकार बनकर गूंज रही है। पहाड़ की बेटी अंकिता भंडारी, जिसने सपने देखे थे, आगे बढ़ने की चाह रखी थी, आज एक नाम भर नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुकी है। अंकिता की हत्या केवल एक बेटी की हत्या नहीं थी, बल्कि उस भरोसे की हत्या थी, जो एक आम परिवार अपनी सरकार और कानून व्यवस्था पर करता है। जिस बेटी को सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वही बेटी रसूख, सत्ता और प्रभाव के आगे कुचल दी गई।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस दर्दनाक मामले को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के संरक्षण में जुड़े लोग इस हत्याकांड में शामिल हैं और सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई। आनन-फानन में रिसॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर सबूत मिटाने के आरोप आज भी पहाड़ की आत्मा को झकझोर देते हैं। उन्होंने कहा इस हत्याकांड के पीछे उनकी क्या मंशा थी यह सभी को पता है यदि सरकार को अपनी प्रतिष्ठा की चिंता है तो उसे तत्काल इस पूरे मामले में सीबीआई जांच करानी चाहिए उन्होंने इस पूरे मामले की जांच हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की सीटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए। लेकिन तथाकथित गट्टू और भट्टू का चेहरा बेनकाब हो गया है, पहाड़ की देवतुल्य जनता इस अपमान का जवाब जरूर देगी।
आज भी सवाल वही हैं…
क्या पहाड़ की बेटी का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने गलत के आगे झुकने से इनकार कर दिया?
क्या उसकी आवाज़ इसलिए दबा दी गई क्योंकि वह ताकतवर लोगों के रास्ते में खड़ी हो गई थी?
कांग्रेस ने साफ किया है कि जब तक अंकिता को इंसाफ नहीं मिलेगा, तब तक यह लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक जारी रहेगी। न्याय केवल एक शब्द नहीं, बल्कि उस बेटी के सपनों की आखिरी उम्मीद है, जो आज इस दुनिया में नहीं है। पहाड़ की बेटी अंकिता की आंखें आज भी सवाल पूछ रही हैं…
क्या उत्तराखंड की बेटियां सुरक्षित हैं?
क्या सत्ता के सफेदपोशों से ऊपर कभी न्याय खड़ा हो पाएगा?





