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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में नई ऊर्जा का संचार, कुलपति ने प्रेस वार्ता में साझा किया विकास का रोडमैप

हल्द्वानी: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के नव नियुक्त कुलपति ने शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान अपने कार्यकाल की प्राथमिकताओं और भावी योजनाओं को साझा किया। उन्होंने कहा कि यह पदभार उनके लिए केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। प्रेस वार्ता की शुरुआत में कुलपति महोदय ने उपस्थित पत्रकारों, शिक्षकों और अधिकारियों का आभार जताते हुए कहा कि, “गुणवत्तापूर्ण दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से राज्य के प्रत्येक कोने तक पहुंचना, शैक्षिक नवाचार को बढ़ावा देना और विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकताएं रहेंगी।”

कुलपति ने साझा की विश्वविद्यालय के विकास की आठ सूत्रीय कार्ययोजना:

  1. विश्वविद्यालय के प्रचार-प्रसार पर विशेष बल:
    डिजिटल युग की जरूरतों को देखते हुए सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के सभी क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से जनसंपर्क को मजबूत किया जाएगा।
  2. क्षेत्रीय अध्ययन केंद्रों का सशक्तिकरण:
    दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को सुविधाजनक शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु अध्ययन केंद्रों को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा।
  3. डिजिटल लर्निंग को सुदृढ़ बनाना:
    ई-लर्निंग, वर्चुअल लैब, ऑडियो-विजुअल सामग्री और MOOC आधारित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि छात्र अधिक प्रभावी ढंग से सीख सकें।
  4. कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा:
    नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप, रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही उद्योग–शिक्षा सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
  5. अनुसंधान को बढ़ावा:
    विश्वविद्यालय ‘अनुसंधान प्रोत्साहन नीति’ तैयार करेगा, जिसमें स्थानीय समस्याओं जैसे पर्यावरण, पलायन, जैव विविधता आदि पर शोध को प्राथमिकता दी जाएगी।
  6. शिक्षार्थी हित सर्वोपरि:
    छात्र शिकायत निवारण प्रणाली को पारदर्शी व प्रभावी बनाया जाएगा। परामर्श सत्र और करियर काउंसलिंग सेवाओं को भी सुदृढ़ किया जाएगा।
  7. पारदर्शी व उत्तरदायी प्रशासन:
    प्रशासनिक कार्यप्रणाली को डिजिटल माध्यमों से समयबद्ध और पारदर्शी बनाया जाएगा।
  8. संस्कृति और भाषा संरक्षण:
    उत्तराखंड की लोकभाषाओं और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण हेतु विशेष शैक्षणिक प्रयास किए जाएंगे।

कुलपति महोदय ने यह भी कहा कि, “यह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्था नहीं, बल्कि उत्तराखंड के हजारों विद्यार्थियों की आशाओं का केंद्र है। हम सभी का प्रयास होगा कि इसे ज्ञान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व का आदर्श संस्थान बनाया जाए।”

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट, निदेशक क्षेत्रीय सेवाएं प्रो. गिरिजा पाण्डेय, निदेशक अकादमिक प्रो. पी.डी. पंत, परीक्षा नियंत्रक प्रो. सोमेश कुमार, वित्त नियंत्रक एस.पी. सिंह एवं पत्रकारिता और मीडिया अध्ययन विभाग के निदेशक प्रो. राकेश चंद्र रयाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।

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