उत्तराखण्ड
हल्द्वानी : एसआरआई द्वारा आयोजित महिला रामलीला में सीता हरण की लीला ने सभी को किया रोमांचित
सूपनखा नासिका छेदन व सीता हरण की लीला ने सभी को रोमांचित किया।
हल्द्वानी।
एसआरआई संस्था द्वारा शीशमहल रामलीला मैदान में आयोजित प्रथम महिला रामलीला के छठे दिन आज शनिवार को सूर्पणखा की नाक काटने और सीता हरण का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से भगवान की जीवंत लीला को दिखाया।
यहां पंचवटी में रावण की बहन शूर्पनखा ने राम को देखा और उन पर मोहित हो गई। उसने राम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे राम ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वे विवाहित हैं और एक पत्नी व्रत का पालन करते हैं।
राम के इनकार से क्रोधित होकर शूर्पनखा राक्षसी रूप में सीता की ओर दौड़ी। लक्ष्मण ने उसका नाक काट दिया। अपमानित शूर्पनखा रोते हुए रावण के दरबार में पहुंची।
शूर्पनखा की बात सुनकर रावण ने अपने मामा मारीचि को मायावी मृग का रूप धारण करने के लिए तैयार किया। मारीचि ने मायावी मृग बनकर राम और लक्ष्मण को जंगल की ओर दूर ले जाने का कार्य किया।
राम और लक्ष्मण के आश्रम से दूर जाने पर, रावण साधु वेश में आया और सीता का हरण कर लिया। सीता के विलाप को सुनकर दर्शक शोक में डूब गए।
यहां राम की भूमिका में मानसी रावत, लक्ष्मण- अंशिका जीना, सीता- खुशी जोशी,
सूर्पनखा- प्रिया जोशी और गीता पाण्डेय,
खर-चंपा रौतेला, दूषण- दीपा तिवारी,
रावण-दीपा कोश्यारी, मारीच- हीना जोशी, जोगी रावण- रमा उनियाल, जटायु- जया तिवारी थी।
इस अवसर पर शीशमहल पुरुष रामलीला कमेटी के मुख्य व्यवस्थापक गिरीश चन्द्र तिवारी व अध्यक्ष मोहन चन्द्र तिवारी ने दीप प्रज्ज्वलन कर छठे दिन की लीला मंचन का विधिवत शुभारंभ किया।मुख्य अतिथि के रूप में ललित जोशी जी, रश्मि जैन, सुजाता माहेश्वरी, ने दीप प्रज्वलित किया।
प्रमोद पलड़िया, कमल पलडिया, ऊषा मुकेश, सुचित्रा जयसवाल, अतुल जायसवाल जी आदि मौजूद रहे।
संस्था अध्यक्ष तनुजा जोशी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीराम के आदर्शों में चलने व सीखने का यह बेहतरीन माध्यम है।
मंच संचालन- रिम्पी बिष्ट ने किया।
इस अवसर पर महामंत्री कौशलेंद्र भट्ट, योगिता बनोला, योगेंद्र साहू, योगेश भोज, हर्षवर्धन जोशी, कामिनी पाल, सीमा देवल, शालिनी गुप्ता, ऊषा मुकेश, समीर शुक्ला, तारा चन्द्र उप्रेती, दिनेश फुलारा, केशव दत्त तिवारी, गौरव जोशी, मोहन चन्द्र जोशी, वरिष्ठ अधिकवक्ता मकरंद प्रताप सिंह व गिरीश सिंह खाती सहित तमाम लोग उपस्तिथ थे।





