उत्तराखण्ड
हल्द्वानी: UOU में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विचार संगोष्ठी आयोजित
हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विज्ञान विद्याशाखा तथा विज्ञानभारती (VIBHA) के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। संगोष्ठी में विज्ञान आधारित शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने की, जबकि मुख्य वक्ता प्रो. कमल किशोर पाण्डेय रहे।
प्रो. कमल देवलाल ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की व्यापक पहुँच प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक है, जिससे विज्ञान शिक्षा एवं वैज्ञानिक सोच को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विज्ञान समाज के विकास एवं राष्ट्र निर्माण का प्रमुख आधार है तथा शिक्षा व्यवस्था में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समावेश अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में प्रो. पी. डी. पंत तथा डॉ. मीनाक्षी राणा ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की प्रासंगिकता, वैज्ञानिक जागरूकता, प्रमुख महिला शोध योजनाओं तथा उच्च शिक्षा में अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि डॉ. के.के. पांडे ने अपने उद्बोधन में महान वैज्ञानिक सी. वी. रमन की वैज्ञानिक खोजों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यों ने भारत को वैश्विक वैज्ञानिक पहचान दिलाई। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण, मेडिकल साइंस, नवाचार और अनुसंधान आधारित शिक्षा को आत्मनिर्भर और प्रगतिशील राष्ट्र के निर्माण के लिए आवश्यक बताया। साथ ही शिक्षकों और विद्यार्थियों से जिज्ञासा, तर्कशीलता और अनुसंधान की भावना विकसित करने का आह्वान किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने आयोजन की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय में अंतर्विषयी शोध, नवाचार और वैज्ञानिक चिंतन को बढ़ावा देने पर बल दिया।
अंत में प्रो. प्रवेश कुमार सहगल ने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन प्रो. अरविन्द भट्ट ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह आयोजन वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।





