उत्तराखण्ड
हल्द्वानी : महिला दिवस पर “नशा मुक्त उत्तराखंड” विषय पर कर्मनिष्ठ सनातन ट्रस्ट एवं नशा मुक्ति चेतना संघ द्वारा एक सार्थक संवाद कार्यक्रम आयोजित
महिला दिवस पर “नशा मुक्त उत्तराखंड” विषय पर कर्मनिष्ठ सनातन ट्रस्ट एवं नशा मुक्ति चेतना संघ द्वारा एक सार्थक संवाद कार्यक्रम आयोजित
हल्द्वानी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर हल्द्वानी स्थित फॉर्च्यून होटल में “नशा मुक्त उत्तराखंड – सशक्त उत्तराखंड” विषय पर एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 60 महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में बढ़ती नशे की समस्या पर गंभीर चर्चा करना और इस चुनौती से निपटने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना था।
कार्यक्रम का संचालन मीनाक्षी कीर्ति जी द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे संवाद को सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाते हुए प्रतिभागियों को विषय से जोड़े रखा।
कार्यक्रम के दौरान कर्मनिष्ठ सनातन ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ भारत भूषण एवं महिला संजोयिका श्रीमती योगिता पाल ( डायरेक्टर पाल ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन्स ) द्वारा नशा मुक्त समाज मै मातृशक्ति की भूमिका पर विशेष चर्चा की गई l
इसमे इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि महिलाएं परिवार का मार्गदर्शन करने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं। परिवार में संस्कार, अनुशासन और जीवन मूल्यों की स्थापना में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। वक्ताओं ने कहा कि महिलाएं केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज को सही दिशा दिखाने में आशा की किरण के रूप में कार्य करती हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मंजुनाथ (आईपीएस) ने अपने संबोधन में परिवारिक मूल्यों और चरित्र निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिवार के संस्कार और व्यक्ति का चरित्र एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं। यदि परिवारों में मजबूत मूल्य और नैतिक आधार स्थापित किए जाएं, तो युवा पीढ़ी को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार व्यक्तिगत स्तर पर, परिवार और समाज मिलकर नशे जैसी बुराई के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ सकते हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए।
कृष्णा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर से जुड़े डॉ मनमीत कौर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट ने नशे के शरीर और मस्तिष्क पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि नशा व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
इसी संस्थान की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ हरप्रीत कौर ने मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से नशे की समस्या को समझाते हुए कहा कि परिवार का भावनात्मक सहयोग, संवाद और जागरूकता युवाओं को नशे की ओर जाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वहीं सरकारी मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी कि मानसिक विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ निकिता देओपा ने अपने संबोधन में युवाओं में बढ़ते नशे के खतरे पर चिंता व्यक्त की और बताया कि जागरूकता, शिक्षा और सही मार्गदर्शन के माध्यम से युवा पीढ़ी को इस समस्या से बचाया जा सकता है।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने भी इस विषय पर अपने विचार साझा किए और इस बात पर सहमति व्यक्त की कि यदि मातृशक्ति संगठित होकर समाज में जागरूकता फैलाए, तो “नशा मुक्त उत्तराखंड” का लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में ट्रस्ट की महिला कोऑर्डिनेटर श्रीमती नेहा गोयल ने सभी प्रतिभागियों को समाज में जागरूकता फैलाने और उत्तराखंड को नशे की समस्या से मुक्त बनाने के लिए सामूहिक संकल्प दिलवाया ।





