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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में 17-18 मार्च को राष्ट्रीय संगोष्ठी, समाज-स्वच्छता और सतत विकास पर होगा मंथन

हल्द्वानी: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग, समाज विज्ञान विद्याशाखा द्वारा 17 और 18 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविद, शोधार्थी और विशेषज्ञ समाज, स्वच्छता और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे।
कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं संरक्षक प्रो. नवीन चंद्र लोहनी हैं, जबकि संयोजक की जिम्मेदारी प्रो. रेनू प्रकाश निभा रही हैं। कार्यक्रम सचिव के रूप में डॉ. भावना डोभाल, डॉ. गोपाल सिंह गौनिया, डॉ. किशोर कुमार, श्रीमती शैलजा, डॉ. नमिता वर्मा, डॉ. सीता, डॉ. द्विजेश उपाध्याय, डॉ. नागेन्द्र गंगोला, डॉ. नीरज जोशी, रितंभरा नैनवाल और विकास जोशी कार्यभार संभाल रहे हैं। मुख्य अतिथि प्रो. जेपी पचौरी, मुख्य वक्ता प्रो. जेके पुंडीर, विशिष्ट वक्ता प्रो. आराधना शुक्ला, प्रो. इंदु पाठक, प्रो. प्रमोद गुप्ता होंगे।
संगोष्ठी की संकल्पना के अनुसार वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समाज, स्वच्छता और सतत विकास लक्ष्य (SDGs) एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए आयाम हैं, जो मानव सभ्यता के समग्र विकास को दिशा प्रदान करते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा निर्धारित इन लक्ष्यों का उद्देश्य वर्ष 2030 तक सामाजिक समावेशन, आर्थिक समृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन को सुनिश्चित करना है। इनमें स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (SDG‑6) को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि स्वच्छता सामाजिक स्वास्थ्य, मानवीय गरिमा और सतत जीवनशैली की आधारशिला मानी जाती है।
समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से स्वच्छता केवल व्यक्तिगत आदतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक परंपराओं, सामूहिक चेतना और संस्थागत व्यवस्थाओं से भी गहराई से जुड़ी हुई है। किसी भी समाज में स्वच्छता से जुड़े व्यवहार शिक्षा, आर्थिक स्थिति, सामाजिक मूल्यों और असमानताओं से प्रभावित होते हैं। विशेष रूप से विकासशील देशों में स्वच्छता की समस्या सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और ग्रामीण-शहरी विभाजन जैसे मुद्दों से भी जुड़ी रहती है।
भारतीय समाज के संदर्भ में स्वच्छता एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषय रहा है। इसी दिशा में केंद्र सरकार द्वारा चलाया गया स्वच्छ भारत अभियान सामाजिक सहभागिता और व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ है।
आयोजकों के अनुसार प्रस्तावित राष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से समाज, स्वच्छता और सतत विकास के आपसी संबंधों का बहुआयामी विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही नीति-निर्माण, सामाजिक जागरूकता और वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में सार्थक संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

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