उत्तराखण्ड
हल्द्वानी: UOU और श्रीलंका ओपन यूनिवर्सिटी के बीच MOU, अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को मिलेगी नई उड़ान
हल्द्वानी: उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय ने वैश्विक शैक्षिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए श्रीलंका ओपन यूनिवर्सिटी के साथ 8 अप्रैल 2026 को औपचारिक रूप से समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता अकादमिक सहयोग, शोध (Research) एवं नवाचार (Innovation) के क्षेत्र में संयुक्त कार्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।
इस ऐतिहासिक समझौते की पृष्ठभूमि भी बेहद महत्वपूर्ण रही है। इससे पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी श्रीलंका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिभाग करने पहुंचे थे, जहां उनकी मुलाकात श्रीलंका ओपन यूनिवर्सिटी के कुलपति से हुई। इस दौरान दोनों शिक्षाविदों के बीच अकादमिक सहयोग और शोध के क्षेत्र में साझेदारी को लेकर सार्थक चर्चा हुई थी।
इसके बाद मार्च 2026 में दक्षिण भारत के तिरुवनंतपुरम में आयोजित भारत के मुक्त विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन में भी दोनों कुलपतियों की पुनः मुलाकात हुई। इस बैठक में पूर्व चर्चा को आगे बढ़ाते हुए सहयोग के विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया और साझेदारी को औपचारिक रूप देने की दिशा में सहमति बनी।
इन सतत संवादों और सकारात्मक पहल का परिणाम यह रहा कि 8 अप्रैल 2026 को दोनों विश्वविद्यालयों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर संपन्न हुए।
इस समझौते के अंतर्गत—
संयुक्त शोध परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा
छात्र एवं संकाय विनिमय (Student & Faculty Exchange) संभव होगा
ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा
वैश्विक स्तर पर अकादमिक गतिविधियों का विस्तार होगा
प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने इस अवसर पर कहा कि यह एमओयू उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगा। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों को वैश्विक मंच पर सीखने और कार्य करने के नए अवसर प्राप्त होंगे।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय पूर्व में भी विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों के साथ शैक्षिक समझौते कर अकादमिक और शोध गतिविधियों को सशक्त करता रहा है और अब यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित हो गई है।
यह एमओयू न केवल भारत और श्रीलंका के बीच शैक्षिक संबंधों को सुदृढ़ करेगा, बल्कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता और ज्ञान-विनिमय को भी नई दिशा देगा। आने वाले समय में यह साझेदारी दोनों विश्वविद्यालयों को वैश्विक शैक्षिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त बनाएगी।





