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उत्तराखण्ड

देहरादून: उत्तराखण्ड में स्कूल बस-वैन शुल्क तय, निर्धारित दर से अधिक वसूली पर रोक

देहरादून: परिवहन आयुक्त कार्यालय उत्तराखण्ड ने राज्य में संचालित स्कूल बसों एवं स्कूल वैन के लिए परिवहन शुल्क की दरें निर्धारित कर दी हैं। यह निर्णय उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय, नैनीताल में विचाराधीन जनहित याचिका में पारित आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। निर्धारित शुल्क अधिकतम सीमा के रूप में तय किया गया है। विद्यालय प्रबंधन एवं अभिभावक आपसी सहमति से इससे कम शुल्क तय कर सकते हैं, लेकिन किसी भी स्थिति में निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क लेना अनुमन्य नहीं होगा। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यालयी वाहनों की बेहतर स्थिति सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। इसके तहत वाहनों में आधुनिक तकनीकों एवं सुरक्षा उपकरणों जैसे सीसीटीवी कैमरा, वीएलटीडी सहित अन्य व्यवस्थाओं को अनिवार्य रूप से लागू करने पर जोर दिया गया है।

शुल्क निर्धारण से पहले राज्य में प्रचलित विभिन्न दरों का विस्तृत अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि अलग-अलग क्षेत्रों में बिना किसी वैज्ञानिक आधार के अलग-अलग शुल्क लिया जा रहा था। उदाहरण के तौर पर उत्तराखण्ड स्कूल वैन एसोसिएशन द्वारा प्रति सीट 4391 रुपये का व्यय बताया गया, जबकि समिति के आकलन में यह व्यय लगभग 3595 रुपये प्रति सीट पाया गया। शुल्क तय करते समय वाहन संचालन से जुड़े सभी खर्चों जैसे वाहन की किस्त, चालक व गार्ड का वेतन, मोटर वाहन कर, बीमा, ईंधन, रखरखाव, परमिट, फिटनेस और सुरक्षा उपकरणों को शामिल किया गया है।

नई व्यवस्था में दूरी के आधार पर शुल्क निर्धारित किया गया है, जिससे अधिक दूरी तय करने वाले विद्यार्थियों से अधिक और कम दूरी वालों से कम शुल्क लिया जाएगा। साथ ही, ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश के दौरान परिवहन शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट का प्रावधान भी किया गया है। विद्यालय परिवहन शुल्क के इस पारदर्शी निर्धारण का अभिभावक संगठनों ने स्वागत किया है और इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा तथा शुल्क प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

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