उत्तराखण्ड
हल्द्वानी : बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने शहर के इन सरकारी और निजी स्कूलों का किया औचक निरीक्षण,दिए यह महत्वपूर्ण निर्देश…

हल्द्वानी : उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की माननीय अध्यक्ष गीता खन्ना द्वारा हल्द्वानी में निर्मला कॉन्वेंट स्कूल ,राजकीय प्राथमिक विद्यालय कटघरिया , राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कटघरिया एवं हल्दीचौड़ स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस विद्यालय एवं राजकीय इंटर कॉलेज का औचक निरीक्षण किया गया। हल्दीचौड़ के विद्यालय में सुविधाएँ, बच्चों का आचरण, और साफ-सफाई सराहनीय पाई गई। वार्डन और बच्चों के मध्य सामंजस्य भी अच्छा दिखा। इस अवसर पर वार्डन, मुख्य शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी तथा कॉर्डिनेटर आदि उपस्थित थे।सरकारी विद्यालय में एक ही परिसर में दो विद्यालय संचालित थे—एक जूनियर और एक प्राइमरी। बच्चों के पास पठन-पाठन की समुचित सामग्री उपलब्ध कराई गई थी, किन्तु सफाई व्यवस्था उचित प्रतीत नहीं हुई। सामान्य क्षेत्र में बच्चों को शिक्षण दिए जाने हेतु कहा गया।निर्मला कॉन्वेंट स्कूल में प्रधानाचार्य अवकाश पर थीं, और उनकी अनुपस्थिति में किसी भी वरिष्ठ अध्यापिका के स्थान पर लेखाकार द्वारा कार्य देखा नहीं जा रहा था, जिन्हें विद्यालय की कार्यप्रणाली तथा बच्चों के अधिकारों से संबंधित कोई भी जानकारी नहीं थी। 1098 और बाल अधिकार संरक्षण आयोग की भी उन्हें जानकारी नहीं थी। कक्षाओं में संख्या से अधिक बच्चों का दाखिला किया गया था, जिससे छोटी-छोटी कक्षाओं में अनियंत्रित रूप से बच्चों को बैठाया गया था।विद्यालय द्वारा बच्चों को प्रदान की गई डायरी में उत्तराखंड से संबंधित कोई गीत इंगित नहीं था, जिससे छात्रों को उत्तराखंड की संस्कृति की जानकारी मिल सके। पूरे विद्यालय को एक धर्म विशेष के चिन्हों से सजाया गया था। विद्यालयों में सभी धर्मों का सम्मान होना चाहिए, ऐसे में किसी एक धर्म को प्राथमिकता देना उचित नहीं है।लगभग 3000 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालय में प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा शून्य पाई गई। प्राथमिक चिकित्सा उपचार हेतु एक छोटा-सा बॉक्स प्रधानाचार्य के कक्ष में रखा हुआ था। पूछने पर बताया गया कि आवश्यकता पड़ने पर एक नर्स को बुला लिया जाता है।काउंसलर के नाम पर एक अध्यापिका को प्रस्तुत किया गया, जो कक्षा 11 और 12 को साइकोलॉजी पढ़ाती हैं, किन्तु विद्यालय में एक स्थायी काउंसलर नियुक्त नहीं की गई है। परिसर में पीटीए, 1098, उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग आदि के सूचकांक नहीं लगाए गए हैं।विद्यालय को निर्देशित किया गया है कि सभी कमियों का शीघ्र निवारण सुनिश्चित कर आयोग को अवगत करवाए।







