उत्तराखण्ड
हल्द्वानी : एसआरआई की महिला रामलीला में केवट प्रसंग ने किया भाव विभोर…
एसआरआई की महिला रामलीला में केवट प्रसंग व राम भरत मिलाप ने सभी को किया भावविभोर।
हल्द्वानी।
एसआरआई संस्था द्वारा शीशमहल काठगोदाम में आयोजित महिला रामलीला के पांचवें दिन केवट प्रसंग व राम भरत मिलाप ने सभी की आंखे भिगो दी
यहां डायरेक्टर मुकेश कुमार जोशी निर्देशन व मोहन चन्द्र जोशी संगीत निर्देशन में व कुश पांडे ने तबला वादक का विभाग सम्भाला है
केवट प्रसंग (राम-केवट संवाद): कलाकारों ने गंगा तट पर केवट द्वारा प्रभु श्रीराम, सीता और लक्ष्मण को नाव में बैठाकर नदी पार कराने के दृश्य को जीवंत किया। केवट द्वारा राम के चरण धोने और राम नाम की महिमा का गुणगान करने का दृश्य भक्तों को भावविभोर कर देता है।
दशरथ मरण और सुमंत्र की वापसी: सुमंत को वन से अकेला वापस अयोध्या लौटते देख राजा दशरथ अत्यंत दुखी हो जाते हैं। वनवास के वियोग में राजा दशरथ अपने प्राण त्याग देते हैं, जिसे ‘दशरथ मरण’ या ‘दशरथ वियोग’ के रूप में दिखाया।
मुख्य अतिथि के रूप में दमुवाढूंगा शीशमहल रामलीला समिति के सभी सदस्यों में गीरीश तिवारी , केशव तिवारी , खिमानन्द तिवारी विक्रम डंगवाल, राधा मिश्रा, मीना डंगवाल रहे।
भरत-केवट संवाद (भरत केवट मिलन): निषादराज और भरत के बीच केवट संवाद का मंचन किया जाता है, जहाँ भरत को राम के वन गमन का समाचार मिलता है।
राम-भरत मिलाप (चित्रकूट): रामलीला का सबसे भावुक दृश्य भरत-मिलाप होता है। भरत, शत्रुघ्न, माताएं और गुरु वशिष्ठ चित्रकूट में राम से मिलते हैं।
भरत द्वारा श्रीराम को वापस अयोध्या चलने का आग्रह करना और राम द्वारा वनवास के निर्णय पर अडिग रहने का मंचन किया जाता है।
चरण पादुका संवाद: भरत राम से उनकी चरण पादुकाएं (खड़ाऊं) मांगते हैं और राम के लौटने तक खड़ाऊं को सिंहासन पर रखकर संन्यासी की तरह राज्य संभालने का वचन देते हैं।
यहां राम की भूमिका में मानसी रावत, लक्ष्मण- अंशिका जीना, सीता- खुशी जोशी, केवट- दीपा तिवारी, दशरथ-भुवनेश्वरी जोशी, कौशल्या का पात्र कामिनी पाल, भरत-यशस्वी जोशी, कैकेई-गीता नैनवाल, सुमंत- गीता तिवारी थी।
रामलीला का निर्देशन श्री मुकेश जोशी की देखरेख में हो रहा है।
इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष तनुजा जोशी ने बताया कि महिलाओं के सशक्तिकरण व उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं को बाहर लाने के लिए महिला रामलीला एक बेहतरीन माध्यम बन रहा है।
उन्होंने बताया कि राम के आदर्शों में चलने के लिए हमे राजकाज में सहयोग करना चाहिए।
मंच संचालन- रिम्पी बिष्ट ने किया।
इस अवसर पर महामंत्री कौशलेंद्र भट्ट, योगिता बनोला, योगेंद्र साहू, मोहन चन्द्र तिवारी, समीर शुक्ला, तारा चन्द्र उप्रेती, दिनेश फुलारा, गौरव जोशी, मोहन चन्द्र जोशी, वरिष्ठ अधिकवक्ता मकरंद प्रताप सिंह सहित तमाम लोग उपस्तिथ थे।





