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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी: UOU में राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारम्भ, स्वच्छता और सतत् विकास पर गहन मंथन

हल्द्वानी: उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “समाज, स्वच्छता एवं सतत् विकास लक्ष्यः एक समाजशास्त्रीय चिंतन” का शुभारम्भ 17 मार्च 2026 को सी. डी. एस. जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में हुआ। यह संगोष्ठी 17 एवं 18 मार्च तक आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के विद्वानों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी की संयोजक प्रो. रेनू प्रकाश ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य स्वच्छता और सतत् विकास के सामाजिक आयामों पर गंभीर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है, ताकि सैद्धांतिक और व्यवहारिक समझ विकसित हो सके।उद्घाटन सत्र में विशिष्ट वक्ता प्रो. इन्दु पाठक ने स्वच्छता को सामाजिक संरचना और सामुदायिक सहभागिता से जोड़ते हुए कहा कि स्वच्छता की संस्कृति को समझे बिना इसका प्रभावी विकास संभव नहीं है। वहीं प्रो. अराधना शुक्ला ने स्वच्छता के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आदतें सामाजिक परिवेश और शिक्षा से विकसित होती हैं तथा विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना जरूरी है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. जे. पी. पचौरी ने स्वच्छता और सतत् विकास को वैश्विक विमर्श का केंद्र बताते हुए भारतीय परंपराओं और सामुदायिक मूल्यों की भूमिका पर बल दिया। मुख्य वक्ता प्रो. जे. के. पुण्डीर ने कहा कि स्वच्छता केवल भौतिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी आवश्यक है और विश्वविद्यालयों को इस दिशा में शोध व जनजागरूकता बढ़ानी चाहिए।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि स्वच्छता एक सामाजिक चेतना और सामूहिक जिम्मेदारी का विषय है तथा सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण अनिवार्य है।इस अवसर पर संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नागेंद्र गंगोला ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. डिगर सिंह फर्सवान द्वारा प्रस्तुत किया गया।कार्यक्रम सचिव डॉ. गोपाल सिंह गौनिया ने बताया कि उद्घाटन सत्र के बाद प्रथम दिवस में चार तकनीकी सत्र आयोजित हुए, जिनमें 34 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इन शोधपत्रों में समाज, स्वच्छता और सतत् विकास लक्ष्यों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।संगोष्ठी के माध्यम से विद्वानों और शोधार्थियों के बीच सार्थक शैक्षणिक संवाद स्थापित हुआ और स्वच्छता व सतत् विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण विचार सामने आए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और विभिन्न संस्थानों के प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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