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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी- रमेश बंबईया पर लिखी जायेगी किताब, जेल हाईजैक पर बनेगी बेव सीरीज

Haldwani news उत्तराखंड निर्माण के बाद हल्द्वानी में अपराध का ग्राफ जरूर कम हुआ, लेकिन सच्ची घठित कहानियां आज भी हर शहरवासी के जुबान पर रहती है। अपराध की दुनिया में से एक नाम था रमेश चिलवाल उर्फ बंबईया, जिसके सिर्फ नाम से ही दहशत फैला जाया करती थी, दरअसल आज चर्चा का विषय इसलिए बना हुआ की रमेश बंबईया पर एक किताब लिखी जा रही है, जो बाद में फीचर फिल्म का रूप भी ले सकती है। जिसके लिए मुंबई की संवाददाता एवम लेखिका येशा कोटक पिछले एक माह से रिसर्च कर रहीं हैं। इसके साथ ही जेल हाईजैक पर भी वेब सीरीज को लेकर काम किया जा रहा है।

हल्द्वानी ही नहीं कुमाऊं में एक समय रमेश बंबईया की खासी दहशत थी। शराब से लेकर खनन कारोबार में उसका डंका बजता था। उसकी जान लेने के लिए कई बार दूसरे गैंग के लोगों ने कोशिश की थी, लेकिन अपनी चालाकी और किस्मत से हर बार बच गया। बाद में बीमारी के चलते उसकी जेल में ही मौत हो गई। आपको बता दें मूलत: रानीखेत के रहने वाले रमेश चिलवाल उर्फ बंबईया के पिता मुंबई के एक अस्पताल में कर्मचारी थे। रमेश का काफी समय मुंबई में गुजरा, उसकी बोलचाल में मुंबई का असर था।

इसके चलते उसके नाम के साथ बंबईया शब्द जुड़ गया। बताते हैं कि मुंबई में रहने के दौरान ही रमेश का संपर्क कुछ अराजक लोगों से हुआ, इसके बाद वह अपराध की राह पर चल पड़ा। बाद में वह हल्द्वानी लौटा और शीशमहल क्षेत्र में रहने लगा। यहां उसने अवैध शराब के कारोबार में अपनी पैठ बनानी शुरू की और देखते ही देखते बड़े स्तर पर शराब तस्करी में जुट गया। इसके बाद एक शराब कारोबारी की सलाह और समझौते के बाद वह शराब का कारोबार छोड़कर गौला नदी के खनन में उतरा, जिसके बाद उसने खनन कांटा लगाया, कांटा लगाने के बाद समझो दौलत बरसने लगी।

राजनीति में भी हाथ आजमाने की कोशिश के चलते रानीखेत विधानसभा से विधायक का चुनाव भी लड़ा, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया। इस दौरान रानीखेत से पहले पिलखोली में उसने अपनी एक आलीशान कोठी भी बनाई, राजनीति में किस्मत ने साथ नहीं दिया तो फिर उसने खनन कारोबार में वापसी कर ली, इस दौरान उस पर कई लोगों की हत्या के आरोप भी लगे। इसके साथ ही वह दूसरे गैंग के निशाने पर आ गया।

बंबईया पर घर से लेकर बेस अस्पताल तक कई बार जानलेवा हमले हुए, हर बार वह बच गया। बेस अस्पताल में भर्ती के दौरान हुए हमले में दूसरा रोगी और सिपाही मारा गया था। इस हमले का आरोप अंडरवर्ल्ड डॉन प्रकाश पांडे उर्फ पीपी पर आया था। बाद में रमेश बंबईया ने खनन कारोबारी विनीत जोशी की हत्या कर दी थी। इसके बाद पूरे शहर में उसके विरोध में प्रदर्शन तक हुए। बंबईया को लेकर लोगों में काफी आक्रोश था, उसके घर में तोड़फोड़ और कार तक जला दी थी। इस मामले में वह गिरफ्तार हुआ और उम्रकैद की सजा हुई। करीब आठ साल बाद बीमारी से रमेश बंबईया की जेल में ही मौत हो गई।

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