उत्तराखण्ड
हल्द्वानी: (बजट 2026) कर प्रणाली में सुधार, आम जनता को दीर्घकालिक राहत की उम्मीद
हल्द्वानी: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026 को कर प्रणाली में सुधार और आर्थिक मजबूती की दिशा में एक संतुलित कदम माना जा रहा है। विधिक विशेषज्ञ एडवोकेट राकेश सिंह रावत का कहना है कि यह बजट सीधे बड़ी कर कटौती देने के बजाय टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने पर केंद्रित है।
उन्होंने कहा कि बजट में आयकर ढांचे में कोई बड़ा बदलाव न करते हुए स्थिरता बनाए रखी गई है, जिससे मध्यम वर्ग पर अचानक अतिरिक्त कर बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार ने आयकर रिटर्न (ITR) प्रक्रिया को सरल और डिजिटल बनाने पर विशेष जोर दिया है, जिससे आम करदाताओं को अनुपालन प्रक्रिया में सुविधा मिलेगी।
विशेषज्ञ के अनुसार, क्रिप्टो आय और अन्य वित्तीय लेन-देन पर रिपोर्टिंग को सख्त किए जाने से कर चोरी पर अंकुश लगेगा। इससे कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी राजस्व मजबूत होगा। दीर्घकाल में यही राजस्व सामाजिक योजनाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में निवेश के लिए उपयोग किया जा सकेगा।
बजट में पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) बढ़ाने की घोषणा को रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास के लिए सकारात्मक कदम बताया गया है। अधिवक्ताओं का मानना है कि भले ही तत्काल बड़ी नकद राहत न दिखे, लेकिन मजबूत आर्थिक ढांचा आने वाले वर्षों में आम जनता को लाभ पहुंचा सकता है।
केंद्रीय बजट 2026–27 के बाद वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लेकर आम जनता में उत्सुकता देखी जा रही है। विधिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि इस बजट में GST दरों में कोई बड़ा प्रत्यक्ष बदलाव नहीं किया गया है। इससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर तत्काल अतिरिक्त कर बोझ नहीं पड़ेगा।
हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में GST संग्रह में वृद्धि हुई है, जो आर्थिक गतिविधियों के सुदृढ़ होने का संकेत है। बढ़ा हुआ कर संग्रह सरकार को बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याण योजनाओं में निवेश की क्षमता देता है, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ आम जनता को बेहतर सुविधाओं और रोजगार अवसरों के रूप में मिल सकता है।
कुल मिलाकर, बजट 2026 को व्यवस्था सुधार और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता का बजट कहा जा सकता है, जो करदाताओं के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाते हुए देश के विकास की नींव को मजबूत करता है।





