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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड के मेकिडल कॉलेज की फीस देश में सबसे महंगी, कैसे मिलेंगे नये डॉक्टर

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए उत्तराखंड हमेशा ही तरसता रहा है। खासकर पहाड़ के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में दम तोड़ देते है। आये दिन कई गर्भवतियों की मौत हो गई। अब राज्य को भविष्य के चिकित्सक मिलने मुश्किल है। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस की फीस चार लाख रुपये सालाना है।

उत्तराखंड में तीन सरकारी मेडिकल कालेज हैं। दून व हल्द्वानी मेडिकल कालेजों में अध्ययनरत छात्रों के अभिभावक लगातार फीस कम करने की मांग उठा रहे हैैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अभिभावकों का एक प्रतिनिधिमंडल मामले मिल चुका है। मंत्री गणेश जोशी ने भी एमबीबीएस की फीस कम करने की वकालत की है। अभिभावकों ने अपनी पीड़ा स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत के सामने भी रखी है।

वर्ष 2018 तक तीनों कालेजों में बांड व्यवस्था थी, दो साल पहले दून और हल्द्वानी मेडिकल कालेज से बांड खत्म कर दिया गया। वहीं छात्रों का कहना है कि बांड व्यवस्था के तहत फीस 50 हजार रुपये सालाना थी। बांड व्यवस्था खत्म होने से अब उन्हेंं तकरीबन 4.25 लाख रुपये सालाना देने पड़ रहे हैं। ऐसे में राज्य के मेधावी और सामान्य घरों के बच्चों के लिए डॉक्टरी की पढ़ाई मुश्किल हो गई है। अगर बांड की व्यवस्था फिर से शुरू हो जाए तो उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। जबकि अन्य राज्यों के सरकारी मेडिकल कालेजों में अधिकतम फीस 1.25 लाख तक है।

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