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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी : ऐतिहासिक मंदिरों एवं मूर्तियों को तोड़े जाने की घटनाओं के विरोध में कांग्रेस ने फूंका भाजपा सरकार का पूतला…

बनारस एवं दिल्ली में वर्षों पुराने मंदिरों तथा देवी-देवताओं की मूर्तियों को चेन से खींचकर तोड़े जाने की घटनाएँ अत्यंत दुखद, निंदनीय एवं देश की आस्था और सांस्कृतिक विरासत को गहरी ठेस पहुँचाने वाली हैं। इन घटनाओं के विरोध में आज बुद्ध पार्क, हल्द्वानी में हल्द्वानी विधायक आदरणीय सुमित हृदयेश के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार का पुतला दहन कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि सनातन परंपरा के प्रतीक मंदिर एवं देवी-देवताओं की मूर्तियाँ केवल पूजन-स्थल नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना, आस्था और सभ्यता की आत्मा हैं।
उन्होंने कहा कि काशी स्थित मणिकर्णिका घाट, जिसकी सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और विशेष महत्ता है, वहाँ यह मान्यता है कि यदि किसी की अंत्येष्टि मणिकर्णिका घाट में हो जाए तो उसे सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह घाट केवल एक भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि पुराणों में वर्णित सनातन परंपरा और धार्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है।
उन्होंने आगे कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस पावन घाट के आसपास स्थित प्राचीन मंदिरों एवं उनमें स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों को जेसीबी मशीनों से तोड़ा गया। यह कृत्य सनातन धर्म की घोर अवहेलना है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरी और गंभीर चोट है। भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने तथाकथित ‘कॉरिडोर’ के नाम पर जिस प्रकार धार्मिक स्थलों और सनातन प्रतीकों को नुकसान पहुँचाया है, वह न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि उनकी आस्था-विरोधी मानसिकता को भी उजागर करता है।

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि काशी जैसे पवित्र और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल में मंदिरों एवं देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़े जाने की घटना अत्यंत शर्मनाक, निंदनीय और आस्था को गहरा आघात पहुँचाने वाली है। काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। वहाँ इस प्रकार की घटनाएँ यह सिद्ध करती हैं कि भाजपा सरकार में सनातन धर्म और उसकी आस्थाएँ सुरक्षित नहीं हैं।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि दिल्ली के ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केंद्र झंडेवाला मंदिर को तोड़े जाने की घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय है। यह केवल एक मंदिर को नुकसान पहुँचाने का मामला नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था पर सीधा हमला है। भाजपा सरकार के शासन में देश की राजधानी तक में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, जो सरकार की नाकामी और दोहरे चरित्र को उजागर करता है।

पुतला दहन के दौरान उपस्थित कांग्रेसजनों ने कहा कि धार्मिक स्थलों एवं सनातन आस्था के प्रतीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन भाजपा सरकार इस जिम्मेदारी को निभाने में पूरी तरह विफल रही है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दोषी अधिकारियों एवं असामाजिक तत्वों की तत्काल पहचान कर उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की मांग करते हुए भविष्य में मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों की सुरक्षा हेतु ठोस, प्रभावी और स्थायी व्यवस्था लागू किए जाने की मांग की।
पुतला दहन कार्यक्रम में वरिष्ठ कांग्रेसी हरीश मेहता, सतीश नैनवाल, हेमंत बगड़वाल, प्रकाश पांडे, हरेंद्र बोरा, एन.बी. गुणवंत, सुहैल सिद्दीकी, नंदन दुर्गापाल, खजान पांडे, मलय बिष्ट, बहादुर बिष्ट, मयंक भट्ट, हेमंत साहू, प्रदीप नेगी, पार्षद भागीरथी बिष्ट, कमला सनवाल, रेनू तोमर, गीता बहुगुणा, अलका आर्य, भगवती जोशी, पुष्पा सम्मल, योगेश जोशी, पार्षद रवि जोशी, विनोद कुमार, पार्षद मोहम्मद गुफरान, ब्लॉक अध्यक्ष मोहन बिष्ट, जाकिर हुसैन, गोविंद बिष्ट, हेमंत पाठक, हिमांशु जोशी सहित सैकड़ों कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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