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उत्तराखण्ड

हल्द्वानी – जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्मृति दिवस पर आयोजित किए गए कार्यक्रम…

भारतीय जनता पार्टी ने आज जनसंघ के संस्थापक सदस्य डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के स्मृति दिवस को प्रत्येक बूथ ,मंडल एवं जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर उनके बलिदान को याद किया । बिठोरिया मंडल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार , जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ,कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत मौजूद रहे ।

बूथ अध्यक्ष विक्रम देवपा की अध्यक्षता में बिठोरिया मंडल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्मृति दिवस मनाया गया । इस दौरान एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई । जिसमें मुख्यवक्ता के रूप में पहुंचे प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार ने कार्यकर्ताओ को संबोधित करते हुए कहा “जहां हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है वो सारा का सारा है ” ऐसी प्रेरणा देने वाले जनसंघ के संस्थापक सदस्य श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उन्होंने कार्यकर्ताओं को देश समाज के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने की प्रेरणा लेने को कहा ,
महामंत्री संगठन अजेय कुमार ने कहा एक देश एक निशान एक संविधान की मांग को लेकर उन्होंने तात्कालिन नेहरू सरकार को चुनौती दी तथा अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहे। अपने संकल्प को पूरा करने के लिये वे 1953 में बिना परमिट लिये जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहाँ पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर नज़रबन्द कर लिया गया। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गयी।
आज देश की नरेंद्र मोदी सरकार ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कश्मीर से धारा 370 हटाने के सपने को पूरा करने का काम किया है । इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पाक अधिकृत कश्मीर की जनता भी आज हिंदुस्तान में शामिल होने की मांग करने लगा है ।
स्मृति दिवस पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कालाढूंगी विधायक बंशीधर भगत ने कहा डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल के विभाजन के समय हिंदू बहुल क्षेत्रों को भारत में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हमारे देश के लिए डॉ मुखर्जी की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है. उनके विचार आज भी भारतीय जनता पार्टी और अन्य राष्ट्रवादी संगठनों में प्रतिबिंबित होते हैं.

जिलाध्यक प्रताप बिष्ट ने गोष्ठी में शामिल कार्यकर्ताओ को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति दिवस पर संबोधित करते हुए कहा मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। उस समय जम्मू कश्मीर का अलग झण्डा और अलग संविधान था। वहाँ का मुख्यमन्त्री अर्थात् प्रधानमन्त्री कहलाता था। संसद में अपने भाषण में डॉ॰ मुखर्जी ने धारा-370 को समाप्त करने की भी जोरदार वकालत की। अगस्त 1952 में जम्मू की विशाल रैली में उन्होंने अपना संकल्प व्यक्त किया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान प्राप्त कराऊँगा या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर दूँगा । मुखर्जी के सपने को साकार करने काम देश की केंद्र एवं राज्य सरकार ईमानदारी से कर रही है ।

इस दौरान जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट, महामंत्री संगठन अजेय कुमार , विधायक बंशीधर भगत , जिला महामंत्री रंजन बरगली , मंडल अध्यक्ष सुरेश गौड़ , बूथ अध्यक्ष विक्रम देवपा , महामंत्री दीपक सनवाल , दीपक बिष्ट ,कार्यक्रम संयोजक विनोद कुमार गौला , प्रदेश महामंत्री किसान मोर्चा महेंद्र नेगी , दिगंबर भोजक , नरेश खुल्वे ,दयाल पांडे , कंचन उप्रेती ,समेत भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

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    भक्ति का सुगंध बिखेरते हुए 58वें निरंकारी सन्त समाम का सफलतापूर्वक समापन जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियों में नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति में निहित है- सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराजहल्द्वानी 28 जनवरी, 2025:- ‘‘जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियों में नहीं बल्कि आत्मिक उन्नति में निहित है।’ये उद्गार निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने महाराष्ट्र के 58वें वार्षिक निरंकारी सन्त समागम के तीसरे एवं समापन दिवस पर लाखों की संख्या में उपस्थित मानव परिवार को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। इस तीन दिवसीय समागम का कल रात विधिवत रूप में सफलता पूर्वक समापन हो गया। सतगुरु माता जी ने आगे कहा कि मनुष्य जीवन को इसलिए ऊँचा माना गया है, क्योंकि इस जीवन में आत्मज्ञान प्राप्त करने की क्षमता है। परमात्मा निराकार है, और इस परम सत्य को जानना मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य होना चाहिए। अंत में सतगुरु माता जी ने फरमाया कि जीवन एक वरदान है और इसे परमात्मा के साथ हर पल जुड़कर जीना चाहिए। जीवन के हर पल को सही दिशा में जीने से ही हमें आत्मिक सन्तोष एवं शान्ति मिल सकती है, हम असीम की ओर बढ़ सकते हैं। इसके पूर्व समागम के दूसरे दिन सतगुरु माता जी ने अपने अमृत वचनों में कहा कि जीवन में भक्ति के साथ कर्तव्यों के प्रति जागरुक रहकर संतुलित जीवन जियें यह आवाहन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने पिंपरी पुणे में आयोजित 58वें वार्षिक निरंकारी सन्त समागम के दूसरे दिन शाम को सत्संग समारोह में विशाल रूप में उपस्थित श्रद्धालुओं को किया। सतगुरु माताजी ने फरमाया कि जैसे एक पक्षी को उड़ने के लिए दोनों पंखों की आवश्यकता होती है, वैसे ही जीवन में भक्ति के साथ साथ अपनी सामाजिक एवं पारिवारिक जिम्मदारियों को निभाना अति आवश्यक है। यदि कोई केवल भक्ति में ही लीन रहते हैं और कर्मक्षेत्र से दूर भागने का प्रयास करते हैं तो जीवन संतुलित बनना सम्भव नहीं। दूसरी तरफ भक्ति या आध्यात्मिकता से किनारा करते हुए केवल भौतिक उपलब्धियों के पीछे भागने से जीवन को पूर्णता प्राप्त नहीं हो सकती। सतगुरु माताजी ने आगे समझाया कि वास्तव में भक्ति और जिम्मेदारियों का निर्वाह का संतुलन तभी सम्भव हो पाता है जब हम जीवन में नेक नीयत, ईश्वर के प्रति निष्काम निरिच्छित प्रेम और समर्पित भाव से सेवा का जज्बा रखें। केवल ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना काफी नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में अपनाना भी आवश्यक है। एक उदाहरण के द्वारा सतगुरु माता जी ने समझाया कि जैसे कोई दुकानदार अपने काम को पूरी ईमानदारी और संतुलन के साथ करता है, ग्राहक को मांग के अनुसार सही नापतोल करके माल देता है और उसका उचित मूल्य स्वीकारता है। अपने कार्य में पूरी तरह से संतुलन बनाए रखता है। इसी तरह भक्त परमात्मा से जुड़कर हर कार्य उसके अहसास में करता रहता है, सत्संग सेवा एवं सिमरण को प्राथमिकता देता है, यही वास्तविकता में भक्ति का असली स्वरूप है। इसके पहले आदरणीय निरंकारी राजपिता रमित जी ने अपने विचारों में कहा कि भक्ति का उद्देश्य परमात्मा के साथ एक प्रेमपूर्ण नाता जोड़ने का हो। इसके लिए संतों का जीवन हमारे लिए प्रेरणास्रोत होता है जो हमें अपनी आत्मा का मूल स्वरूप परमात्मा को जानकर जीवन का विस्तार असीम सच्चाई की ओर बढ़ाने की शिक्षा देता है। आपने बताया कि हमें अपनी आस्था और श्रद्धा को सच्चाई की ओर मोड़ना चाहिए और हर पल कदम में परमात्मा के प्रेम को महसूस करना चाहिए तभी सही मायनो में भक्ति का विस्तार सार्थक होगा। समागम की कुछ झलकियां कवि दरबार            समागम के तीसरे दिन एक बहुभाषी कवि दरबार का आयोजन किया गया जिसमें जिसका विषय था ‘विस्तार – असीम की ओर।’महाराष्ट्र के अतिरिक्त देश के विभिन्न स्थानों से आए हुए 21 कवियों ने मराठी, हिन्दी, अंग्रेजी, कोंकणी, भोजपुरी आदि भाषाओं में इस कवि दरबार में काव्य पाठ करते हुए मिशन के दिव्य सन्देश को प्रसारित किया। श्रोताओं द्वारा कवियों की भूरि भूरि प्रशंसा की गई।             मुख्य कवि दरबार के अतिरिक्त समागम के पहले दिन बाल कवि दरबार एवं दूसरे दिन महिला कवि दरबार का आयोजन लघु रूप में किया गया। इन दोनों लघु कवि दरबार कार्यक्रमों में मराठी, हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषाओं के माध्यम से 6 बाल कवि एवं 6 महिला कवियों ने काव्य पाठ किया जिसकी श्रोताओं द्वारा अत्यधिक प्रशंसा की गई।  निरंकारी प्रदर्शनीसमागम में ’विस्तार-असीम की ओर’इस मुख्य विषय पर आधारित निरंकारी प्रदर्शनी श्रोताओं के लिए मुख्य आर्कषण का केन्द्र बनी रही। इस दिव्य प्रदर्शनी को मूलतः दो भागों में विभाजित किया गया था जिसके प्रथम भाग में भक्तों को मिशन के इतिहास, विचारधारा एवं सामयिक गतिविधियों के अतिरिक्त सतगुरु द्वारा देश व विदेशों में की गई दिव्य कल्याणकारी प्रचार यात्राओ की पर्याप्त जानकारी दी गई थी। द्वितीय भाग में संत निरंकारी चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग के सभी उपक्रमों व गतिविधियों को दर्शाया गया था जिसमें प्रोजेक्ट वननेस जो पुरे भारतवर्ष में चल रहे है उसके सम्बंधित कुछ विशेष मॉडल्स इस प्रदर्शनी का केंद्रबिंदू बने रहे। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट अमृत और निरंकारी इंस्टिट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड आर्ट्स को देखने के लिए श्रद्धालु जन उत्साहित दिखाई दिए।    कायरोप्रॅक्टिक शिविरसमागम में काईरोप्रैक्टिक तकनीक के द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य लाभ का शिविर आयोजित किया गया। यह तकनीक पूर्ण तोर पर रीढ़ की हड्डी से जुडी है। इस तकनीक द्वारा हर रोज लगभग हजार लोग समागम में इस सेवा का लाभ उठा रहे थे। ऑस्ट्रेलिया, यूनाईटेड किंगडम, फ्रांस, अमेरिका के 18 डॉक्टरों की टीम समागम ग्राउंड में अपनी निस्वार्थ सेवाएं प्रदान कर रही थी। इस वर्ष करीब 3500 से अधिक जरुरतमंद श्रद्धालुओं ने इस स्वास्थ्य सुविधा का लाभ प्राप्त किया। निःशुल्क डिस्पेन्सरीसमागम स्थल पर 60 बिस्तर का एक अस्पताल बनाया गया था जिसमें किसी को कोई गंभीर समस्या आने पर आईसीयू की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई थी। इसके अतिरिक्त समागम स्थल पर तीन स्थानों पर होम्योपैथी डिस्पेंसरी की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी जिसमें रोजाना 3 से 4 हजार जरुरतमंद श्रद्धालु लाभ प्राप्त कर रहे थे। समागम स्थल पर 11 एम्बुलेंस रखी गई थी। वाय.सी.एम.ए.अस्पताल और डी.वाय.पाटिल  अस्पताल द्वारा भी अपनी डिस्पेन्सरीज की सेवायें उपलब्ध कराई गई थी। इन डिस्पेंसरियों में 282 डॉक्टर्स की टीम एवं लगभग 450 सेवादल स्वयंसेवक अपनी सेवाएं दे रहे थे। लंगर            समागम में आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क लंगर की व्यवस्था तीन स्थानों पर  की गई थी जिसमें सतगुरु प्रवचन के के अलावा 24 घंटे लंगर उपलब्ध किया जा रहा था। इस लंगर व्यवस्था में 72 क्विंटल चावल एक ही समय पर पकाने की क्षमता थी। 70 हजार श्रद्धालु एक ही समय भोजन कर सकते थे। इसके अतिरिक्त अत्यधिक रियायति दरों पर 4 कॅन्टीन्स  की व्यवस्था की गई थी जिसमें अल्पाहार, मिनरल वाॅटर एवं चाय-काॅफी इत्यादि सामग्री प्राप्त हो रही थी।

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